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सोयाबीन में कॉलर रॉट (बुंधा कुज) रोग का लक्षण और उपाय 🌱 Mushroom

सोयाबीन की खेती में किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें सबसे बड़ी समस्या फसल में लगने वाले रोग हैं। सोयाबीन की फसल में शुरुआती दिनों में लगने वाला एक मुख्य रोग कॉलर रॉट है। इसे मराठी में बुंधा कुज भी कहते हैं। यह बीमारी फंगस के कारण फैलती है। इसके कारण सोयाबीन के छोटे पौधे शुरुआत में ही सूखकर मर जाते हैं। इससे किसानों को बड़ा नुकसान होता है और खेत में पौधों की संख्या कम हो जाती है।

अगर आप सही समय पर इस बीमारी की पहचान कर लें तो अपनी फसल को बचा सकते हैं। आज के इस ब्लॉग में हम सोयाबीन के कॉलर रॉट यानी बुंधा कुज रोग के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से जानेंगे। इस जानकारी को पढ़कर आप अपनी सोयाबीन की फसल को इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रख सकते हैं।

कॉलर रॉट (बुंधा कुज) रोग क्या है? 🤔

कॉलर रॉट सोयाबीन का एक बहुत ही खतरनाक फंगस जनित रोग है। यह बीमारी ‘स्क्लेरोशियम रॉल्फसी’ नाम के फंगस के कारण होती है। यह फंगस मुख्य रूप से मिट्टी के अंदर मौजूद रहता है। जब मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है और तापमान अधिक होता है तब यह फंगस तेजी से सक्रिय हो जाता है। यह बीमारी खेत में पैच यानी छोटे-छोटे टुकड़ों में दिखाई देती है। शुरुआत में खेत के कुछ ही पौधे सूखते हैं लेकिन धीरे-धीरे यह बीमारी आसपास के पौधों में भी फैल जाती है।

बुंधा कुज रोग फैलने के मुख्य कारण 🌧️

यह बीमारी कुछ खास परिस्थितियों में बहुत तेजी से फैलती है। किसानों को इन कारणों को समझना बहुत जरूरी है:

  • खेत में अधिक नमी: अगर खेत में लगातार पानी जमा रहता है और जल निकासी का अच्छा प्रबंध नहीं होता तो यह फंगस तेजी से बढ़ता है।
  • ज्यादा तापमान: उमस भरा मौसम और अधिक तापमान इस फंगस के बढ़ने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।
  • संक्रमित मिट्टी: यदि पिछले साल भी खेत में यह बीमारी आई थी तो इस साल भी इसके आने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।
  • कच्ची गोबर की खाद: खेत में अधकची या बिना सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से भी इस फंगस को पनपने का मौका मिलता है।

कॉलर रॉट (बुंधा कुज) के मुख्य लक्षण 🔍

सोयाबीन के पौधे में इस रोग के लक्षण जमीन के पास वाले हिस्से पर दिखाई देते हैं। इसकी पहचान आप नीचे दिए गए लक्षणों से कर सकते हैं:

  • तने का रंग बदलना: पौधे का जो हिस्सा जमीन से सटा होता है यानी तने का निचला भाग भूरा या काले रंग का होने लगता है।
  • सफेद फंगस दिखना: संक्रमित तने और उसके आसपास की मिट्टी पर सफेद रंग के धागे जैसी फंगस की परत दिखाई देने लगती है।
  • सरसों जैसे दाने बनना: कुछ दिनों बाद इस सफेद फंगस पर छोटे-छोटे सरसों के दाने जैसे कत्थई या भूरे रंग के गोल दाने बन जाते हैं जिन्हें स्क्लेरोशिया कहते हैं।
  • पौधे का सूखना: तने का निचला हिस्सा सड़ जाने के कारण पौधा जमीन से पानी और पोषक तत्व नहीं ले पाता है। इसके कारण पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पूरा पौधा अचानक सूखकर मर जाता है।

कॉलर रॉट (बुंधा कुज) रोग के बचाव और उपाय 🚜

इस बीमारी को आने से रोकने और खेत में फैलने से बचाने के लिए किसानों को जैविक और रासायनिक दोनों तरह के उपायों को अपनाना चाहिए।

१) जैविक उपाय (Biological Control) 🌱

जैविक तरीके से इस बीमारी को रोकना सबसे सुरक्षित और असरदार माना जाता है। इसके लिए आप नीचे दिए गए उपाय कर सकते हैं:

  • गहरी जुताई: गर्मियों के दिनों में अपने खेत की मिट्टी पलटकर गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी के अंदर छिपे हुए फंगस तेज धूप के कारण नष्ट हो जाते हैं।
  • ट्राइकोडेरमा का उपयोग: गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद में ट्राइकोडेरमा विरिडी या ट्राइकोडेरमा हर्ज़िएनम मिलाकर खेत में आखिरी जुताई के समय डालें। एक एकड़ के लिए २ से ३ किलो ट्राइकोडेरमा पर्याप्त होता है।
  • फसल चक्र अपनाएं: हर साल एक ही खेत में लगातार सोयाबीन की फसल न लगाएं। सोयाबीन के बाद खेत में दलहन की जगह अनाज वाली फसलें जैसे मक्का या ज्वार की बुवाई करें।

२) रासायनिक उपाय (Chemical Control) 🧪

यदि खेत में बीमारी का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है तो सही समय पर रासायनिक दवाओं का उपयोग करना चाहिए:

  • बीज संस्कार (Seed Treatment): बुवाई से पहले सोयाबीन के बीज का उपचार करना सबसे जरूरी है। इसके लिए आप कार्बेन्डाजिम + मैंकोज़ेब (साफ) २.५ ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से मिलाकर लगाएं। या फिर कार्बोक्सिन + थायराम (विटावैक्स पावर) ३ ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से इस्तेमाल करें।
  • दवा का छिड़काव या ड्रेंचिंग: यदि खड़ी फसल में कुछ पौधे सूखे दिखाई दें तो संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दें। इसके बाद खेत में फंगस के फैलाव को रोकने के लिए टेबुकोनाजोल २५.९% ईसी दवा का १ से १.५ मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों के तने के पास छिड़काव या ड्रेंचिंग करें।
  • पानी का निकास: भारी बारिश के समय खेत में पानी बिल्कुल न रुकने दें। पानी निकलने के लिए खेत में नालियां बनाएं।

किसानों के लिए जरूरी सलाह 📝

सोयाबीन की फसल को बुंधा कुज रोग से बचाने के लिए हमेशा प्रमाणित और स्वस्थ बीजों का ही चुनाव करें। बिना बीज उपचार के सोयाबीन की बुवाई बिल्कुल न करें। बीज उपचार करने से फसल शुरुआती ३० से ४० दिनों तक सभी प्रकार के फंगस जनित रोगों से सुरक्षित रहती है। खेत की लगातार निगरानी करें और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत उचित कदम उठाएं।

इन आसान और वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर आप अपनी सोयाबीन की फसल को कॉलर रॉट रोग से पूरी तरह बचा सकते हैं। इससे आपकी फसल हरी-भरी रहेगी और आपको सोयाबीन की बंपर पैदावार मिलेगी।

Writer: – Advance Farming Technics 🌱🐛🐞Website: advancefarmingtechnics.com/Contact: advancefarmingtechnics@gmail.com

✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar


🛡️ Editorial Review Process: This article has been reviewed by the Advance Farming Technics editorial team for accuracy. Prices and government policies are subject to change. Always consult local agricultural officers for final confirmation.

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