मेळघाट संघर्ष यात्रा: बच्चू कडू के नेतृत्व में वन विभाग का घेराव 🚩
महाराष्ट्र की राजनीति और किसानों के मुद्दों पर हमेशा सक्रिय रहने वाले पूर्व विधायक बच्चू कडू एक बार फिर चर्चा में हैं। गुरुवार (5 मार्च 2026) को मेळघाट संघर्ष महापदयात्रा के दौरान आंदोलनकारियों ने जारिदा में वन विभाग के कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया।
यह आंदोलन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि मेळघाट के आदिवासियों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। बच्चू कडू के नेतृत्व में सैकड़ों प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। उनका कहना है कि वन विभाग की नीतियों के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन? 🤔
मेळघाट का इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जंगलों के लिए जाना जाता है। लेकिन यहाँ रहने वाले लोगों के लिए नियम बहुत कड़े हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें कुछ इस प्रकार हैं:
- रास्तों की समस्या: वन विभाग के कड़े नियमों की वजह से गांवों तक पक्की सड़कें नहीं बन पा रही हैं।
- खेती के अधिकार: कई किसानों को अपनी ही जमीन पर खेती करने में वन विभाग की ओर से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
- बुनियादी सुविधाएं: बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के काम वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण रुके हुए हैं।
- रोजगार: स्थानीय लोगों को जंगल के संसाधनों पर हक और रोजगार की मांग की जा रही है।
जारिदा में भारी तनाव की स्थिति ⚠️
जब यह पदयात्रा जारिदा पहुँची, तो आंदोलनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सीधे वन विभाग के दफ्तर का घेराव कर दिया। बच्चू कडू ने अधिकारियों से सीधे सवाल किए कि आखिर सालों से विकास के काम क्यों लंबित हैं।
इस घेराव के दौरान पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। बच्चू कडू का कहना है कि जब तक प्रशासन लिखित में ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। मेळघाट के दुर्गम इलाकों से आए बुजुर्ग और महिलाएं भी इस पदयात्रा में शामिल हैं, जो उनके जज्बे को दिखाता है।
वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच टकराव 🌳
मेळघाट में अक्सर वन विभाग और आदिवासियों के बीच टकराव की खबरें आती रहती हैं। एक तरफ जंगल और वन्यजीवों को बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ वहां सदियों से रह रहे इंसानों की जरूरतें हैं।
बच्चू कडू का तर्क है कि पर्यावरण की रक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर इंसानों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना गलत है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को बीच का रास्ता निकालना चाहिए जिससे विकास भी हो और प्रकृति भी बची रहे।
आगे क्या होगा? 🔍
बच्चू कडू की यह ‘मेळघाट संघर्ष महापदयात्रा’ अब एक बड़ा रूप ले चुकी है। सरकार पर इस आंदोलन का भारी दबाव है। यदि मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र हो सकता है।
किसानों और आदिवासियों के इस संघर्ष में ‘एडवांस फार्मिंग टेक्निक्स’ हमेशा उनके साथ है। हम चाहते हैं कि हमारे किसान भाई समृद्ध हों और उन्हें उनके हक मिले। इस आंदोलन से जुड़ी हर बड़ी अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।
अगर आपको लगता है कि मेळघाट के लोगों की मांगें सही हैं, तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं।
Writer: – Advance Farming Techniques 🌱🐛🐞
Website: advancefarmingtechnics.com
Contact: advancefarmingtechnics@gmail.com
✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
🛡️ Editorial Review Process: This article has been reviewed by the Advance Farming Technics editorial team for accuracy. Prices and government policies are subject to change. Always consult local agricultural officers for final confirmation.






