अप्रैल में शकरकंद की नर्सरी कैसे तैयार करें

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शकरकंद की खेती: अप्रैल में ऐसे तैयार करें नर्सरी 🌱

शकरकंद एक ऐसी फसल है जो कम पानी और कम मेहनत में अच्छा मुनाफा देती है। इसे ‘स्वीट पोटैटो’ भी कहा जाता है। अप्रैल का महीना इसकी नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप सही तरीके से नर्सरी लगाएंगे, तो मुख्य खेत में पौधों की रोपाई के बाद पैदावार शानदार होगी। शकरकंद की मांग बाजार में साल भर रहती है। आइए जानते हैं नर्सरी तैयार करने की पूरी विधि।

सही कंदों का चुनाव करें 🌾

नर्सरी के लिए हमेशा स्वस्थ और मध्यम आकार के शकरकंद चुनें। कंदों में किसी भी प्रकार का रोग या कटाव नहीं होना चाहिए। पिछले साल की फसल से बचाए गए अच्छे कंद इसके लिए सबसे बेहतर होते हैं। कंद जितने अच्छे होंगे, उनसे निकलने वाली बेलें उतनी ही मजबूत होंगी। मजबूत बेलों से ही आगे चलकर मिट्टी के अंदर बड़े और मीठे शकरकंद बनेंगे। बीज के रूप में इस्तेमाल होने वाले कंदों को साफ पानी से धो लेना चाहिए।

नर्सरी के लिए जमीन की तैयारी 🚜

नर्सरी के लिए ऐसी जगह चुनें जहाँ धूप अच्छी आती हो। मिट्टी को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरा बना लें। इसमें गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाएं। इससे मिट्टी में पोषण बढ़ता है और पौधों की जड़ें जल्दी निकलती हैं। नर्सरी के लिए उठी हुई क्यारियां बनाना सबसे अच्छा रहता है। इससे पानी का निकास सही रहता है। ज्यादा पानी जमा होने से कंद सड़ सकते हैं। क्यारियों के बीच थोड़ी दूरी रखें ताकि काम करने में आसानी हो।

कंद बोने का सही तरीका ⚙️

तैयार क्यारियों में कंदों को 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं। इन्हें मिट्टी में लगभग 5 सेंटीमीटर गहरा दबाएं। बोने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें। कंदों को लगाने के तुरंत बाद हल्का पानी दें। ध्यान रहे कि मिट्टी में हमेशा नमी बनी रहे लेकिन कीचड़ न हो। अप्रैल की गर्मी में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। कुछ ही दिनों में कंदों से हरी-भरी बेलें निकलनी शुरू हो जाएंगी।

नर्सरी की देखभाल और सुरक्षा 💰

जब बेलें निकलने लगें, तो समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें। खरपतवारों को निकालते रहें क्योंकि वे पौधों का पोषण छीन लेते हैं। अगर कीटों का हमला दिखे, तो जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। बेलों को तेजी से बढ़ाने के लिए हल्की मात्रा में यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। करीब 45 से 60 दिनों में ये बेलें खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती हैं। स्वस्थ बेलें ही सफल खेती का आधार हैं।

खेत में रोपाई की तैयारी 🚜

जब नर्सरी में बेलें 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी हो जाएं, तब उन्हें ऊपर से काट लें। इन कटी हुई बेलों को ही मुख्य खेत में लगाया जाता है। बेलों को काटते समय ध्यान रखें कि हर हिस्से में कम से कम 2-3 गांठें हों। मानसून की शुरुआत में इन्हें खेत में लगाना सबसे अच्छा होता है। शकरकंद की खेती रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी होती है। सही प्रबंधन से एक छोटे खेत से भी भारी मात्रा में उपज ली जा सकती है।

मुनाफे की फसल 🐛

शकरकंद की खेती में लागत बहुत कम आती है। इसे पशुओं से ज्यादा खतरा नहीं होता और यह विपरीत मौसम में भी टिकी रहती है। आजकल बाजार में बैंगनी और नारंगी रंग के शकरकंद की भी मांग बढ़ी है। इनमें विटामिन और पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। अगर किसान भाई तकनीक के साथ खेती करें, तो यह उनकी किस्मत बदल सकती है। यह फसल कम समय में तैयार होकर घर को खुशियों से भर देती है।

अप्रैल का समय बीतने न दें। आज ही अपनी नर्सरी की योजना बनाएं। सही बीज और सही तकनीक के मेल से आप एक सफल उत्पादक बन सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों से संपर्क कर नई किस्मों की जानकारी लें। आपकी छोटी सी मेहनत भविष्य में बड़ा लाभ देगी। शकरकंद उगाएं और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएं।



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