दिल्ली में आहार मेला 2026: भारतीय कृषि निर्यात की नई वैश्विक पहचान 🌱
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में 10 मार्च 2026 को 40वें आहार (AAHAR) अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेले का भव्य उद्घाटन हुआ। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की। यह मेला भारत के खाद्य क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस बार मेले का मुख्य केंद्र ‘फूड प्रोसेसिंग’ और ‘ग्लोबल एक्सपोर्ट’ को बनाया गया है, जो सीधे तौर पर हमारे किसानों की आय से जुड़ा है।
फूड प्रोसेसिंग: समय की मांग और किसानों का भविष्य 🐛
मंत्री पीयूष गोयल ने अपने भाषण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने जोर दिया कि भारत को अब केवल कच्चा माल (Raw Material) निर्यात करने वाला देश नहीं बने रहना चाहिए। अगर हम गेहूं को सीधे निर्यात करते हैं, तो उसका दाम कम मिलता है। लेकिन अगर हम उस गेहूं से पास्ता या बिस्किट बनाकर निर्यात करते हैं, तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
इसे ही फूड प्रोसेसिंग या मूल्य संवर्धन (Value Addition) कहा जाता है। सरकार चाहती है कि किसान और उद्यमी मिलकर काम करें। इससे न केवल विदेशी मुद्रा आएगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे कारखाने लगेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को नौकरी के लिए शहर नहीं भागना पड़ेगा।
एपीडा (APEDA) की प्रदर्शनी: भारत की कृषि शक्ति का प्रदर्शन 🐞
इस मेले में एपीडा (APEDA) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। यहाँ 100 से ज्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जो पूरी दुनिया को दिखा रहे हैं कि भारतीय उत्पाद किसी से कम नहीं हैं।
मेले के मुख्य आकर्षण:
- मिलेट्स (Millets): श्री अन्न यानी मोटे अनाज से बने उत्पादों की यहाँ जबरदस्त मांग है।
- जैविक उत्पाद: रसायन मुक्त खेती से तैयार फल और सब्जियां विदेशी खरीदारों को लुभा रही हैं।
- पैकेजिंग तकनीक: ऐसी पैकेजिंग दिखाई गई है जिससे सामान हफ्तों तक खराब नहीं होता।
- बीटूबी (B2B) मीटिंग्स: भारतीय किसानों के संगठनों को सीधे विदेशी व्यापारियों से बात करने का मौका मिल रहा है।
कृषि निर्यात को बढ़ाने की ठोस रणनीतियां 🌱
भारत सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में कृषि निर्यात को वर्तमान स्तर से दोगुना किया जाए। इसके लिए आहार मेले में विशेषज्ञों ने कुछ खास सुझाव दिए हैं:
1. गुणवत्ता और मानक (Quality Standards) 🚜
विदेशी बाजारों में सामान बेचने के लिए उसकी गुणवत्ता बहुत सख्त होनी चाहिए। सरकार अब ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर रही है। इससे विदेशी खरीदार क्यूआर कोड स्कैन करके जान सकते हैं कि फसल किस खेत में उगी है और उसमें कौन सी खाद डाली गई है।
2. लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन ❄️
खेती के सामान जल्दी खराब हो जाते हैं। इसीलिए सरकार देशभर में कोल्ड स्टोरेज और फास्ट कार्गो की सुविधा बढ़ा रही है। आहार मेले में ऐसी नई मशीनें दिखाई गई हैं जो फलों को खेत से बंदरगाह तक ले जाते समय ताजा रखती हैं।
3. नए बाजारों की खोज 🌏
अभी तक भारत का ज्यादातर सामान खाड़ी देशों या यूरोप जाता था। अब सरकार का ध्यान अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के बाजारों पर भी है। 100 से ज्यादा प्रदर्शक इन्हीं नए बाजारों के खरीदारों के साथ समझौते कर रहे हैं।
किसानों के लिए क्या है इसमें खास? 💡
अक्सर किसान सोचते हैं कि दिल्ली के मेले से उन्हें क्या मिलेगा? असल में, यह मेला आपकी फसल की मांग तय करता है। जब एपीडा जैसे संस्थान विदेशों में मांग बढ़ाते हैं, तो स्थानीय मंडियों में व्यापारियों के बीच आपकी फसल खरीदने की होड़ मचती है। इससे आपको बेहतर एमएसपी (MSP) से भी ज्यादा दाम मिल सकते हैं।
किसानों के लिए कुछ सुझाव:
- निर्यात होने वाली फसलों (जैसे बासमती, आम, अंगूर) की खेती पर ध्यान दें।
- फसल की सफाई और छंटाई (Grading) अच्छे से करें ताकि उसे अच्छे दाम मिलें।
- एफपीओ (FPO) यानी किसान उत्पादक संगठन बनाकर सीधे कंपनियों से जुड़ें।
भविष्य की आधुनिक खेती का विजन 🚀
40वां आहार मेला यह साबित करता है कि भारत अब दुनिया की रसोई बनने के लिए तैयार है। तकनीक, इनोवेशन और सही मार्केटिंग के जरिए हम भारतीय खेती को एक ग्लोबल ब्रांड बना सकते हैं। पीयूष गोयल के नेतृत्व में जो नीतियां बन रही हैं, वे छोटे किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने का काम करेंगी।
अगले कुछ वर्षों में, हम देखेंगे कि भारतीय गांवों से निकला सामान न्यूयॉर्क और लंदन के सुपरमार्केट में शान से बिकेगा। यह आत्मनिर्भर भारत और उन्नत कृषि की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
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