दुनिया में युद्ध का तनाव, पर भारत में खाद का भंडार है तैयार
दुनिया के कुछ देशों में चल रहे तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। समुद्र के रास्तों में दिक्कत आ रही है और जहाज समय पर नहीं पहुँच पा रहे हैं। इससे पूरी दुनिया में खाद की कमी का डर बना हुआ है। लेकिन भारत के किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार ने खरीफ सीजन से पहले ही एक बहुत बड़ा मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। 🚢⚓
सरकार ने “अग्रिम भंडारण रणनीति” अपनाकर खाद का इतना स्टॉक जमा कर लिया है कि आने वाले समय में कोई कमी नहीं होगी। इसका मतलब है कि विदेशी संकट का सीधा असर हमारे खेतों और फसलों पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने समय रहते सही कदम उठाकर अन्नदाताओं की चिंता दूर कर दी है।
खाद की कोई कमी नहीं: सरकार का दावा
भारत के उर्वरक विभाग ने साफ कर दिया है कि देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इस समय भारत के पास कुल 177 लाख मीट्रिक टन खाद जमा है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 36% ज्यादा है। इसमें यूरिया का स्टॉक भी बढ़कर 59 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। 📦🌾
इतने बड़े स्टॉक की वजह से खरीफ की बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। डीएपी और एनपीके जैसे जरूरी खाद भी भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। सरकार का यह कदम विदेशी बाजार के उतार-चढ़ाव से भारतीय खेती को बचाने के लिए उठाया गया है।
सरकार का बड़ा फैसला: टैक्स में भारी छूट
खाद को सस्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। खाद बनाने में काम आने वाले करीब 40 रसायनों (केमिकल्स) पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। यह छूट 2 अप्रैल से 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। इससे खाद बनाने वाली कंपनियों की लागत कम होगी। 📉💰
अमोनियम नाइट्रेट और फास्फोरिक एसिड जैसे जरूरी केमिकल अब सस्ते दाम पर मिलेंगे। इससे खाद की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी। इसके साथ ही कृषि मशीनों और लिक्विड फर्टिलाइजर पर लगने वाले टैक्स में भी राहत दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि खाद सस्ती रहे ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न बढ़े।
इफको (IFFCO) की किसानों को खास सलाह
इफको के एमडी केजी पटेल ने किसानों को भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए कुछ जरूरी बातें बताई हैं। उनका कहना है कि हमें केवल यूरिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आबादी बढ़ रही है पर जमीन उतनी ही है, इसलिए हमें नई तकनीक अपनानी होगी: 🔬🌱
- नैनो फर्टिलाइजर्स: कम मात्रा में ज्यादा असर दिखाने वाले नैनो खाद का उपयोग करें।
- बायोस्टिमुलेंट्स: ‘सागरिका’ और ‘धरामृत’ जैसे प्राकृतिक उत्पाद इस्तेमाल करें जो मिट्टी को ताकत देते हैं।
- प्राकृतिक खेती: रसायनों का इस्तेमाल कम करें और जैविक खेती (Organic Farming) की ओर बढ़ें।
- स्वदेशी खाद: देश में बनी खाद का अधिक उपयोग करें ताकि हमें दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।
आत्मनिर्भर खेती और मिट्टी की सेहत
भारत सरकार हर साल खाद पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है। यह पैसा अंत में विदेशों में ही जाता है क्योंकि हम कच्चा माल बाहर से मंगाते हैं। अगर किसान भाई प्राकृतिक खाद और नई तकनीक अपनाएंगे, तो देश का पैसा बचेगा और हमारी मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी। 🌍✨
प्रधानमंत्री ने भी अपील की है कि हर किसान अपनी कम से कम एक या दो एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती जरूर शुरू करे। इससे केमिकल का खर्चा बचेगा और लोगों को शुद्ध अनाज मिलेगा।
आज के चुनौतीपूर्ण समय में भारत सरकार की तैयारी बहुत मजबूत है। किसान भाई बिना किसी डर के अपनी खेती की तैयारी कर सकते हैं। सरकार का यह मास्टरप्लान खेती को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 🌱🐛🐞
✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
🛡️ Editorial Review Process: This article has been reviewed by the Advance Farming Technics editorial team for accuracy. Prices and government policies are subject to change. Always consult local agricultural officers for final confirmation.






