मेड़ पर जिमीकंद की खेती: खाली जगह से कमाएं लाखों


“`

353552

खेत की मेड़ पर उगाएं जिमीकंद, खाली जगह से होगी मोटी कमाई 🌱

अक्सर किसान अपने खेत की मेड़ों को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन मेड़ों पर जिमीकंद यानी सूरन लगाकर आप एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं? इसे ‘एलिफेंट फुट याम’ भी कहते हैं। इसकी खेती बहुत आसान है और इसमें मेहनत भी कम लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेड़ पर जिमीकंद उगाना एक समझदारी भरा फैसला है।

मेड़ पर जिमीकंद उगाने के फायदे

जिमीकंद को खेत के किनारों पर लगाने से मुख्य फसल को कोई नुकसान नहीं होता। यह जमीन के अंदर बढ़ता है, इसलिए इसे ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। मेड़ पर लगाने से इसे पानी के निकास की अच्छी सुविधा मिलती है। ज्यादा पानी जमा होने से यह खराब हो सकता है, लेकिन मेड़ की ऊंचाई इसे सड़ने से बचाती है।

इसकी फसल में कीड़े और बीमारियां बहुत कम लगती हैं। जानवर भी इसे खाना पसंद नहीं करते, इसलिए रखवाली की चिंता कम रहती है। एक बार लगाने के बाद यह खुद ही बढ़ता रहता है। बाजार में जिमीकंद की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे अच्छा भाव मिलता है।

खेती का सही समय और तरीका ☀️

जिमीकंद लगाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून तक का होता है। इसके लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। लगाने से पहले मेड़ की अच्छी तरह सफाई करें। मिट्टी में थोड़ा गोबर का खाद मिलाएं। बीज के रूप में पुराने जिमीकंद के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

टुकड़ों को मिट्टी में करीब 6 से 8 इंच गहरा दबाएं। एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 2 से 3 फिट रखें। लगाने के बाद मेड़ को पुआल या सूखी पत्तियों से ढक दें। इसे मल्चिंग कहते हैं। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।

देखभाल और पोषण 🐞

जिमीकंद को बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। शुरुआती समय में थोड़ी नाइट्रोजन और पोटाश देना फायदेमंद रहता है। अगर आप जैविक खेती करना चाहते हैं, तो केवल गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें। इससे जिमीकंद का स्वाद और क्वालिटी अच्छी होती है।

समय-समय पर मेड़ के आसपास उगे खरपतवार को हटाते रहें। यदि मिट्टी बहुत ज्यादा सख्त हो जाए, तो हल्की गुड़ाई करें। ध्यान रहे कि गुड़ाई करते समय पौधे की जड़ों या कंद को चोट न पहुंचे। स्वस्थ पौधों से ही आपको बड़े कंद प्राप्त होंगे।

सिंचाई का प्रबंधन 💧

जिमीकंद को नमी पसंद है, लेकिन जलभराव बिल्कुल नहीं। मेड़ पर खेती करने का यही सबसे बड़ा लाभ है। बारिश का अतिरिक्त पानी नीचे बह जाता है और पौधे को सिर्फ जरूरी नमी मिलती है। गर्मियों में हल्की सिंचाई करते रहें ताकि मिट्टी एकदम सूख न जाए।

अगर आप मुख्य फसल में पानी लगा रहे हैं, तो मेड़ को उससे मिलने वाली नमी पर्याप्त होती है। अलग से बहुत ज्यादा पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। बस इस बात का ध्यान रखें कि कंद पूरी तरह मिट्टी से ढका रहे। अगर धूप से कंद बाहर दिखने लगे, तो उस पर और मिट्टी चढ़ा दें।

खुदाई और मुनाफा 💰

जिमीकंद की फसल तैयार होने में लगभग 7 से 8 महीने का समय लेती है। जब पौधे की पत्तियां पीली होकर सूखने लगें, तब समझें कि फसल तैयार है। खुदाई बड़े ध्यान से करें ताकि कंद कटे नहीं। एक पौधे से 5 से 10 किलो तक का जिमीकंद निकल सकता है।

बाजार में इसकी कीमत अच्छी रहती है। खास तौर पर त्योहारों के सीजन में इसकी मांग बढ़ जाती है। मेड़ पर की गई यह खेती किसानों के लिए एक बोनस की तरह है। इससे आपकी कुल आय में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।


Writer: – Advance Farming Techniques 🌱🐛🐞

Website: advancefarmingtechnics.com

Contact: advancefarmingtechnics@gmail.com

“`

Share this knowledge with your network and help others grow.

WhatsApp
Facebook
X
LinkedIn
Pinterest
Telegram
Email
Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *