गर्मी में अरहर की खेती: कम पानी में बंपर पैदावार के गुप्त तरीके

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गर्मी में अरहर की खेती: तेज धूप और सूखे में भी मिलेगी भारी उपज 🌱

अरहर भारत की सबसे मुख्य दलहनी फसलों में से एक है। इसे ‘तुअर’ के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर अरहर मानसून में बोई जाती है। लेकिन आधुनिक तकनीक से अब गर्मी यानी जायद के मौसम में भी इसकी सफल खेती संभव है। गर्मी में अरहर उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस समय कीटों का हमला बहुत कम होता है। यह फसल मिट्टी की गहराई से पानी सोखने की क्षमता रखती है। आइए जानते हैं भीषण गर्मी में अरहर उगाने के सबसे आसान और सटीक तरीके।

गर्मी सहने वाली किस्मों का चयन 🌾

गर्मी की खेती के लिए अरहर की ऐसी किस्में चुनें जो जल्दी पकती हों। ‘यूपीएएस-120’, ‘आईसीपीएल-151’ और ‘प्रभात’ जैसी किस्में गर्मी के लिए बहुत अच्छी हैं। ये किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं। इससे मानसून आने से पहले आपकी फसल सुरक्षित घर पहुंच जाती है। हमेशा प्रमाणित और उपचारित बीज ही खरीदें। बीज का चयन करते समय उसकी चमक और वजन पर ध्यान दें। अच्छे बीज ही शानदार फसल की नींव होते हैं।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜

अरहर की जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं। इसलिए खेत की एक बार गहरी जुताई करना बहुत जरूरी है। इसके बाद दो बार हल्की जुताई करके मिट्टी को समतल कर लें। बुवाई का सही समय 15 मार्च से अप्रैल के पहले हफ्ते तक है। बीजों को कतारों में बोना सबसे अच्छा रहता है। कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें। इससे पौधों को फैलने के लिए पूरी जगह और हवा मिलती है।

गर्मी में सिंचाई का कुशल प्रबंधन 💧

अरहर सूखे को झेलने वाली फसल है। लेकिन गर्मी के मौसम में नमी बनाए रखना जरूरी है। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद या हल्की नमी में करें। इसके बाद हर 15 से 20 दिनों के अंतर पर पानी दें। जब पौधों में फूल आ रहे हों, तब सिंचाई पर विशेष ध्यान दें। इस समय पानी की कमी होने पर फूल झड़ सकते हैं। शाम के समय सिंचाई करने से पानी का नुकसान कम होता है और जड़ों को ठंडक मिलती है।

खाद और मिट्टी का पोषण 💰

अरहर की जड़ें खुद अपनी खाद (नाइट्रोजन) बनाती हैं। इसलिए इसे बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं पड़ती। बुवाई के समय खेत में फास्फोरस और पोटाश का सही मिश्रण डालें। 20 किलो नाइट्रोजन और 50 किलो फास्फोरस प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है। सल्फर का उपयोग करने से दानों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है। अगर मुमकिन हो तो बुवाई से पहले खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलाएं। इससे मिट्टी की पानी रोकने की ताकत बढ़ जाती है।

खरपतवार और सुरक्षा के तरीके ⚙️

शुरुआत के 40 से 50 दिनों तक खेत में घास न उगने दें। खरपतवार फसल का हिस्सा खा जाते हैं जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। एक या दो बार निराई-गुड़ाई करने से जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है। गर्मी में अरहर पर ‘फली छेदक’ कीट का खतरा हो सकता है। इससे बचने के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें। फसल की नियमित निगरानी करते रहें। साफ और स्वस्थ खेत हमेशा अधिक मुनाफा देता है।

मिट्टी की सेहत और फसल चक्र 🐛

अरहर उगाने से मिट्टी को बहुत लाभ होता है। इसकी गिरी हुई पत्तियां खेत में प्राकृतिक खाद का काम करती हैं। यह मिट्टी की परतों को ढीला करती है जिससे अगली फसल की पैदावार बढ़ती है। इसे फसल चक्र में जरूर शामिल करना चाहिए। अरहर के बाद आप धान या गेहूं की फसल ले सकते हैं। यह न केवल आपको दाल देती है बल्कि आपके खेत को भी उपजाऊ बनाती है।

कटाई और सुरक्षित भंडारण 🚜

जब अरहर की फलियां सूखकर भूरी हो जाएं और दाने हिलाने पर आवाज करें, तब कटाई करें। कटाई के बाद पौधों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं। थ्रेसिंग करके दानों को अलग कर लें। भंडारण से पहले दानों को 2-3 दिन तेज धूप में सुखाएं। दानों में नमी 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। सूखे दानों को नमी रहित कोठियों या बोरियों में भरकर रखें। इससे घुन लगने का डर नहीं रहता।

गर्मी में अरहर उगाना एक स्मार्ट किसानी का हिस्सा है। यह फसल कम खर्च में और कम पानी में आपको बड़ा मुनाफा दे सकती है। आज के समय में दालों के दाम अच्छे मिल रहे हैं। ऐसे में अरहर की खेती आपके लिए आर्थिक रूप से बहुत मजबूत कदम होगा। सही तकनीक अपनाएं और अपनी मेहनत को फलदायी बनाएं। अरहर उगाएं और खुशहाली की ओर कदम बढ़ाएं।



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