गर्मी में मूंगफली की खेती: भारी पैदावार और शानदार मुनाफे के टिप्स 🌱
मूंगफली को ‘गरीबों का बादाम’ कहा जाता है। इसमें तेल और प्रोटीन भरपूर होता है। गर्मी के मौसम यानी जायद के समय मूंगफली उगाना बहुत लाभदायक है। इस समय पौधों को भरपूर धूप मिलती है। इससे दानों में तेल की मात्रा बढ़ती है। अगर आपके पास सिंचाई के साधन हैं, तो गर्मी की मूंगफली आपको मालामाल कर सकती है। इस सीजन में कीटों का हमला भी कम होता है। आइए जानते हैं गर्मी में मूंगफली की बंपर पैदावार पाने के सही तरीके।
उन्नत किस्मों का चुनाव और बीज दर 🌾
सफल खेती के लिए सही किस्म चुनना सबसे जरूरी है। गर्मी के लिए ऐसी किस्में चुनें जो कम समय में पकती हों। ‘जीजी-2’, ‘जीजी-7’ या ‘टीजी-37ए’ जैसी किस्में गर्मी के लिए बहुत अच्छी हैं। एक एकड़ के लिए लगभग 40 से 50 किलो स्वस्थ बीजों की जरूरत होती है। बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित जरूर करें। इससे जमीन के अंदर दाने सड़ने का खतरा खत्म हो जाता है। हमेशा भारी और चमकदार दानों का ही चुनाव करें।
खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜
मूंगफली के लिए रेतीली या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। खेत की दो-तीन बार जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लें। बुवाई का सबसे सही समय 15 फरवरी से मार्च के मध्य तक है। बीजों को कतारों में बोएं। दो लाइनों के बीच 30 सेंटीमीटर की दूरी रखें। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए। दानों को 5 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न बोएं। मिट्टी का भुरभुरा होना जरूरी है ताकि फलियां आसानी से जमीन में विकसित हो सकें।
गर्मी में सिंचाई का प्रबंधन ⚙️
गर्मी में मूंगफली को नियमित पानी की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें। इसके बाद मिट्टी के अनुसार 8 से 10 दिन के अंतर पर पानी देते रहें। जब पौधों में फूल आ रहे हों और ‘सुइयां’ (Pegs) जमीन में जा रही हों, तब नमी का खास ध्यान रखें। इस समय पानी की कमी होने पर फलियां कम बनेंगी। शाम के समय सिंचाई करना पौधों के लिए सबसे सुखद रहता है। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, बस नमी बनी रहे।
खाद और मिट्टी का पोषण 💰
मूंगफली एक दलहनी फसल है। इसे बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं पड़ती। बुवाई के समय संतुलित मात्रा में DAP और पोटाश डालें। मूंगफली के लिए जिप्सम (Gypsum) बहुत जरूरी है। फूल आने के समय प्रति एकड़ 100 किलो जिप्सम डालने से फलियां मजबूत बनती हैं और दानों में तेल बढ़ता है। सल्फर का उपयोग दानों की चमक और वजन बढ़ाता है। जैविक खाद का इस्तेमाल मिट्टी को नरम रखता है जिससे फलियां अच्छी फैलती हैं।
खरपतवार और मिट्टी चढ़ाना 🚜
मूंगफली की फसल में खरपतवार बड़ी समस्या बन सकते हैं। बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई जरूर करें। ध्यान रहे कि जब पौधों से सुइयां निकलकर जमीन में जाने लगें, तब निराई न करें। इस समय पौधों के पास हल्की मिट्टी चढ़ा दें। इससे सुइयां आसानी से जमीन में घुसकर फलियां बना पाती हैं। जितनी ज्यादा सुइयां जमीन में जाएंगी, उतनी ही ज्यादा मूंगफली पैदा होगी। साफ खेत ही आपकी मेहनत का पूरा फल देगा।
कीट और रोगों से सुरक्षा 🐛
गर्मी में मूंगफली पर ‘सफेद लट’ (White Grub) का खतरा हो सकता है। यह जड़ों को काटकर पौधों को सुखा देती है। इससे बचने के लिए नीम की खली का प्रयोग करें। अगर पत्तों पर धब्बे दिखें, तो उचित दवा का छिड़काव करें। फसल चक्र अपनाना भी बीमारियों को रोकने का एक अच्छा तरीका है। नियमित रूप से खेत का चक्कर लगाएं। कीटों की समय पर पहचान ही आपकी फसल को बड़े नुकसान से बचा सकती है।
कटाई और दानों का भंडारण 🚜
जब पौधों के पत्ते पीले पड़ने लगें और फलियों के अंदर का छिलका काला दिखने लगे, तब कटाई करें। उखाड़ने के बाद मूंगफली को धूप में अच्छी तरह सुखाएं। जब दानों को हिलाने पर आवाज आने लगे, तब उन्हें अलग कर लें। भंडारण से पहले दानों में नमी 8-10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सूखी मूंगफली को बोरियों में भरकर किसी ठंडी और साफ जगह पर रखें। सही तरीके से रखी गई मूंगफली बाजार में ऊंचे दाम दिलाती है।
गर्मी में मूंगफली उगाना एक बहुत ही मुनाफे वाला काम है। यह फसल कम समय में तैयार होकर आपको अच्छा पैसा दे सकती है। आधुनिक तकनीक और सही खाद-पानी से आप अपनी पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं। मूंगफली न केवल अनाज देती है, बल्कि इसका चारा पशुओं के लिए बहुत ताकतवर होता है। आज ही वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू करें और अपनी आय को नया आयाम दें। समृद्ध किसान ही देश की ताकत है।






