गर्मी में मूंगफली की खेती: बंपर पैदावार के लिए खास टिप्स

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गर्मी में मूंगफली की खेती: अधिक पैदावार और भारी दानों के लिए अपनाएं ये तरीके 🌱

गर्मी के मौसम में मूंगफली की खेती करना किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इस समय उगाई गई मूंगफली में तेल की मात्रा अच्छी होती है और कीटों का डर भी कम रहता है। लेकिन तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच पौधों की सही देखभाल करना बहुत जरूरी है। अगर आप सही तकनीक अपनाते हैं, तो कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मी में मूंगफली की पैदावार बढ़ाने के कुछ बेहतरीन और आसान उपाय।

सही किस्म का चुनाव और बीज उपचार 🌾

गर्मी की खेती के लिए हमेशा ‘गुच्छे वाली’ या कम समय में पकने वाली किस्में चुनें। ऐसी किस्में 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं। बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें। इसके लिए ‘कार्बेंडाजिम’ या ‘थायरम’ जैसी दवाओं का उपयोग करें। उपचारित बीज मिट्टी से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। इससे पौधों का जमाव अच्छा होता है और जड़ सड़ने की समस्या नहीं आती। हमेशा स्वस्थ और भारी दानों वाले बीजों को ही प्राथमिकता दें।

खेत की तैयारी और बुवाई की विधि 🚜

मूंगफली के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें। बीज को मिट्टी में 5 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न बोएं। उचित दूरी होने से पौधों को फैलने के लिए पूरी जगह मिलती है और सूरज की रोशनी जड़ों तक पहुंचती है। इससे फलियों का आकार बड़ा होता है।

जिप्सम का प्रयोग है बहुत जरूरी 💰

मूंगफली की फसल में जिप्सम एक जादू की तरह काम करता है। फूल आने के समय यानी बुवाई के 35-40 दिन बाद खेत में जिप्सम जरूर डालें। यह फलियों को मजबूत बनाता है और दानों में चमक लाता है। कैल्शियम की कमी से अक्सर मूंगफली की फलियां खाली रह जाती हैं, जिसे ‘पॉपिंग’ कहते हैं। जिप्सम इस समस्या को दूर करता है। प्रति एकड़ करीब 100 से 150 किलो जिप्सम डालना पैदावार बढ़ाने का सबसे सस्ता और सटीक तरीका है।

सिंचाई का सही समय और तरीका ⚙️

गर्मी में नमी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। मूंगफली में फूल आने और फलियां बनते समय पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। स्प्रिंकलर या फव्वारा सिंचाई विधि मूंगफली के लिए सबसे उत्तम है। इससे पानी की बचत होती है और जड़ों के पास की मिट्टी सख्त नहीं होती। याद रखें, जब सुइयां (Pegs) मिट्टी में घुस रही हों, तब मिट्टी नरम होनी चाहिए। अगर मिट्टी सख्त हुई तो फलियां नहीं बन पाएंगी। हल्की सिंचाई बार-बार करना ज्यादा फायदेमंद होता है।

खरपतवार और मिट्टी चढ़ाना 🐞

बुवाई के 20 से 25 दिन बाद हल्की गुड़ाई करें। इससे खरपतवार खत्म हो जाते हैं और मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है। लेकिन ध्यान रहे, एक बार जब सुइयां मिट्टी में जाना शुरू कर दें, तो उसके बाद गुड़ाई बिल्कुल न करें। ऐसा करने से बन रही फलियां टूट सकती हैं। पौधों के चारों तरफ हल्की मिट्टी चढ़ा दें ताकि सुइयों को जमीन में जाने में आसानी हो। साफ खेत में बीमारियां कम लगती हैं और पौधों को पूरा पोषण मिलता है।

कीट और रोगों से बचाव 🐛

गर्मी में अक्सर ‘सफेद लट’ और ‘थ्रिप्स’ का हमला होता है। इनकी निगरानी के लिए खेत में ‘येलो स्टिकी ट्रैप’ लगाएं। नीम के तेल का नियमित छिड़काव करने से छोटे कीट दूर रहते हैं। अगर पत्तियों पर धब्बे दिखें, तो फफूंदनाशक का प्रयोग करें। जैविक तरीकों को अपनाकर आप अपनी लागत कम कर सकते हैं। स्वस्थ पौधे ही भारी पैदावार देने में सक्षम होते हैं। समय पर पहचान और इलाज ही फसल की सुरक्षा की कुंजी है।

सही समय पर कटाई और सुखाना 🚜

जब मूंगफली के पौधे पीले पड़ने लगें और पत्तियां झड़ने लगें, तब समझें कि फसल तैयार है। एक-दो पौधों को उखाड़कर फलियों को तोड़कर देखें। अगर छिलके के अंदर का रंग भूरा या काला दिखने लगे, तो कटाई शुरू कर दें। उखाड़ने के बाद फलियों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं। दानों में नमी 8 से 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अच्छी तरह सूखी हुई मूंगफली को आप लंबे समय तक रख सकते हैं और बाजार में अच्छे दाम पा सकते हैं।

मूंगफली की खेती धैर्य और सही तकनीक का मेल है। अगर आप ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपकी मेहनत जरूर रंग लाएगी। उन्नत बीज, समय पर पानी और जिप्सम का सही इस्तेमाल आपको एक सफल किसान बनाएगा। आधुनिक खेती अपनाएं और अपनी आय बढ़ाएं। याद रखें, मिट्टी की सेवा ही भविष्य की मेवा है। आप सभी किसान भाइयों को इस सीजन की सफल फसल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।




[Merged Content From: गर्मी में मूंगफली की खेती कैसे करें? अधिक पैदावार और मोटा दाना पाने के उन्नत तरीके 🌱]





गर्मी में मूंगफली की खेती: अधिक पैदावार पाने के आसान तरीके

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गर्मी में मूंगफली की खेती: भारी पैदावार और शानदार मुनाफे के टिप्स 🌱

मूंगफली को ‘गरीबों का बादाम’ कहा जाता है। इसमें तेल और प्रोटीन भरपूर होता है। गर्मी के मौसम यानी जायद के समय मूंगफली उगाना बहुत लाभदायक है। इस समय पौधों को भरपूर धूप मिलती है। इससे दानों में तेल की मात्रा बढ़ती है। अगर आपके पास सिंचाई के साधन हैं, तो गर्मी की मूंगफली आपको मालामाल कर सकती है। इस सीजन में कीटों का हमला भी कम होता है। आइए जानते हैं गर्मी में मूंगफली की बंपर पैदावार पाने के सही तरीके।

उन्नत किस्मों का चुनाव और बीज दर 🌾

सफल खेती के लिए सही किस्म चुनना सबसे जरूरी है। गर्मी के लिए ऐसी किस्में चुनें जो कम समय में पकती हों। ‘जीजी-2’, ‘जीजी-7’ या ‘टीजी-37ए’ जैसी किस्में गर्मी के लिए बहुत अच्छी हैं। एक एकड़ के लिए लगभग 40 से 50 किलो स्वस्थ बीजों की जरूरत होती है। बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित जरूर करें। इससे जमीन के अंदर दाने सड़ने का खतरा खत्म हो जाता है। हमेशा भारी और चमकदार दानों का ही चुनाव करें।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜

मूंगफली के लिए रेतीली या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। खेत की दो-तीन बार जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लें। बुवाई का सबसे सही समय 15 फरवरी से मार्च के मध्य तक है। बीजों को कतारों में बोएं। दो लाइनों के बीच 30 सेंटीमीटर की दूरी रखें। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए। दानों को 5 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न बोएं। मिट्टी का भुरभुरा होना जरूरी है ताकि फलियां आसानी से जमीन में विकसित हो सकें।

गर्मी में सिंचाई का प्रबंधन ⚙️

गर्मी में मूंगफली को नियमित पानी की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें। इसके बाद मिट्टी के अनुसार 8 से 10 दिन के अंतर पर पानी देते रहें। जब पौधों में फूल आ रहे हों और ‘सुइयां’ (Pegs) जमीन में जा रही हों, तब नमी का खास ध्यान रखें। इस समय पानी की कमी होने पर फलियां कम बनेंगी। शाम के समय सिंचाई करना पौधों के लिए सबसे सुखद रहता है। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, बस नमी बनी रहे।

खाद और मिट्टी का पोषण 💰

मूंगफली एक दलहनी फसल है। इसे बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं पड़ती। बुवाई के समय संतुलित मात्रा में DAP और पोटाश डालें। मूंगफली के लिए जिप्सम (Gypsum) बहुत जरूरी है। फूल आने के समय प्रति एकड़ 100 किलो जिप्सम डालने से फलियां मजबूत बनती हैं और दानों में तेल बढ़ता है। सल्फर का उपयोग दानों की चमक और वजन बढ़ाता है। जैविक खाद का इस्तेमाल मिट्टी को नरम रखता है जिससे फलियां अच्छी फैलती हैं।

खरपतवार और मिट्टी चढ़ाना 🚜

मूंगफली की फसल में खरपतवार बड़ी समस्या बन सकते हैं। बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई जरूर करें। ध्यान रहे कि जब पौधों से सुइयां निकलकर जमीन में जाने लगें, तब निराई न करें। इस समय पौधों के पास हल्की मिट्टी चढ़ा दें। इससे सुइयां आसानी से जमीन में घुसकर फलियां बना पाती हैं। जितनी ज्यादा सुइयां जमीन में जाएंगी, उतनी ही ज्यादा मूंगफली पैदा होगी। साफ खेत ही आपकी मेहनत का पूरा फल देगा।

कीट और रोगों से सुरक्षा 🐛

गर्मी में मूंगफली पर ‘सफेद लट’ (White Grub) का खतरा हो सकता है। यह जड़ों को काटकर पौधों को सुखा देती है। इससे बचने के लिए नीम की खली का प्रयोग करें। अगर पत्तों पर धब्बे दिखें, तो उचित दवा का छिड़काव करें। फसल चक्र अपनाना भी बीमारियों को रोकने का एक अच्छा तरीका है। नियमित रूप से खेत का चक्कर लगाएं। कीटों की समय पर पहचान ही आपकी फसल को बड़े नुकसान से बचा सकती है।

कटाई और दानों का भंडारण 🚜

जब पौधों के पत्ते पीले पड़ने लगें और फलियों के अंदर का छिलका काला दिखने लगे, तब कटाई करें। उखाड़ने के बाद मूंगफली को धूप में अच्छी तरह सुखाएं। जब दानों को हिलाने पर आवाज आने लगे, तब उन्हें अलग कर लें। भंडारण से पहले दानों में नमी 8-10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सूखी मूंगफली को बोरियों में भरकर किसी ठंडी और साफ जगह पर रखें। सही तरीके से रखी गई मूंगफली बाजार में ऊंचे दाम दिलाती है।

गर्मी में मूंगफली उगाना एक बहुत ही मुनाफे वाला काम है। यह फसल कम समय में तैयार होकर आपको अच्छा पैसा दे सकती है। आधुनिक तकनीक और सही खाद-पानी से आप अपनी पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं। मूंगफली न केवल अनाज देती है, बल्कि इसका चारा पशुओं के लिए बहुत ताकतवर होता है। आज ही वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू करें और अपनी आय को नया आयाम दें। समृद्ध किसान ही देश की ताकत है।



✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar


🛡️ Editorial Review Process: This article has been reviewed by the Advance Farming Technics editorial team for accuracy. Prices and government policies are subject to change. Always consult local agricultural officers for final confirmation.

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