गर्मी में मूंग की खेती: मिट्टी की सेहत और बंपर पैदावार के टिप्स 🌱
गर्मी के मौसम में मूंग की खेती किसानों के लिए एक बोनस की तरह है। इसे ‘जायद मूंग’ कहा जाता है। यह फसल मात्र 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है। मूंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी को उपजाऊ बनाती है। गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली रहते हैं, ऐसे में मूंग उगाना एक समझदारी भरा फैसला है। आइए जानते हैं गर्मी में मूंग उगाने और सिंचाई प्रबंधन के सही तरीके।
फसल चक्र और मिट्टी की तैयारी 🌾
मूंग को फसल चक्र यानी रोटेशन में शामिल करना बहुत फायदेमंद है। धान-गेहूं-मूंग का चक्र मिट्टी की ताकत वापस लाता है। गेहूं की कटाई के बाद खेत की हल्की जुताई करें। अगर खेत में नमी कम है, तो पलेवा (बुवाई से पहले सिंचाई) जरूर करें। इससे बीज का अंकुरण एक समान होता है। मूंग के लिए बहुत गहरी जुताई की जरूरत नहीं होती। मिट्टी का भुरभुरा होना ही पर्याप्त है।
उन्नत किस्मों का चुनाव 🚜
गर्मी के लिए ऐसी किस्में चुनें जो जल्दी पकें और जिनमें बीमारियां कम लगें। ‘पंत मूंग-5’, ‘एसएमएल-668’ या ‘मेहा’ जैसी किस्में गर्मी के लिए बहुत अच्छी हैं। ये किस्में एक साथ पकती हैं, जिससे कटाई में आसानी होती है। बीज बोने से पहले उन्हें ‘राइजोबियम कल्चर’ से उपचारित जरूर करें। इससे जड़ों में गांठें अच्छी बनती हैं और फसल को ज्यादा नाइट्रोजन मिलती है।
बुवाई का सही समय और तरीका ⚙️
मूंग की बुवाई 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच कर देनी चाहिए। देर से बुवाई करने पर मानसून की बारिश कटाई में बाधा डाल सकती है। बीजों को कतारों में बोएं। कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखें। बीजों को 4 सेंटीमीटर की गहराई पर डालें। कतार में बुवाई करने से धूप और हवा का संचार अच्छा रहता है। इससे पौधों का विकास तेजी से होता है और फलियां ज्यादा लगती हैं।
सिंचाई का कुशल प्रबंधन 💧
गर्मी में मूंग को 3 से 4 सिंचाइयों की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें। इसके बाद मिट्टी की नमी देखकर 10-15 दिनों के अंतर पर पानी दें। ध्यान रहे कि फूल आने और फलियां बनने के समय खेत में नमी बनी रहे। इस समय पानी की कमी से पैदावार गिर सकती है। स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई मूंग के लिए सबसे अच्छी है क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और जड़ें सड़ती नहीं हैं।
खाद और उर्वरक प्रबंधन 💰
मूंग एक दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की कम जरूरत होती है। बुवाई के समय थोड़ा यूरिया और अच्छी मात्रा में फास्फोरस (DAP) दें। फास्फोरस से जड़ें मजबूत होती हैं और फलियां ज्यादा आती हैं। अगर मिट्टी में गंधक (Sulphur) की कमी है, तो उसे जरूर डालें। इससे दानों में चमक बढ़ती है और तेल की मात्रा में सुधार होता है। जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की बनावट को बेहतर बनाता है।
कीट और रोगों से सुरक्षा 🐛
गर्मी में मूंग पर ‘पीला मोजेक’ वायरस का खतरा रहता है। यह सफेद मक्खी के कारण फैलता है। इससे बचने के लिए रोग प्रतिरोधी किस्में लगाएं। अगर खेत में पीले पत्ते दिखें, तो उन्हें तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें। कीटों के नियंत्रण के लिए नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 दिन बाद एक निराई जरूर करें। साफ खेत में पैदावार हमेशा बेहतर होती है।
कटाई और भंडारण 🚜
जब 80 प्रतिशत फलियां पककर काली या भूरी हो जाएं, तब कटाई शुरू करें। ज्यादा सूखने पर फलियां चटक सकती हैं और दाने बिखर सकते हैं। कटाई के बाद फसल को खलिहान में अच्छी तरह सुखाएं। दानों में नमी 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। सूखे दानों को साफ बोरियों में भरकर ठंडी जगह रखें। मूंग की दाल की मांग हमेशा रहती है, इसलिए इसे सही समय पर बेचकर आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
गर्मी में मूंग उगाना न केवल पैसे देता है, बल्कि आपकी अगली फसल (जैसे धान) के लिए खेत को तैयार भी करता है। यह कम मेहनत और कम समय की खेती है। आधुनिक तकनीक अपनाकर आप अपनी खेती की लागत कम कर सकते हैं। किसान भाइयों को फसल चक्र में मूंग को जरूर शामिल करना चाहिए। आपकी मेहनत और सही जानकारी ही खेती को समृद्ध बनाएगी।
✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
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