शहतूत की उन्नत खेती: ग्राफ्टिंग तकनीक से बढ़ाएं मुनाफा 🌱
शहतूत की खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा नहीं रही। पहले शहतूत का पौधा लगाने के बाद फल के लिए चार साल रुकना पड़ता था। लेकिन अब ग्राफ्टिंग तकनीक ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया है। राजस्थान के पुष्कर से किसान कमलेश भाटी ने इसे सच कर दिखाया है। उनके द्वारा तैयार पौधे केवल एक साल में ही भरपूर फल देने लगते हैं। यह तकनीक समय और पैसा दोनों बचाती है।
ग्राफ्टिंग तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है? 🌿
ग्राफ्टिंग को आम भाषा में ‘कलम लगाना’ कहते हैं। इसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़ा जाता है। नीचे वाला हिस्सा ‘रूटस्टॉक’ कहलाता है जो जमीन से पोषक तत्व लेता है। ऊपर वाला हिस्सा ‘सायन’ होता है जो अच्छी किस्म के फल देता है। जब इन दोनों को सही तरीके से बांधा जाता है, तो पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है। ग्राफ्टिंग के कारण पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। इससे फल बड़े, रसीले और मीठे पैदा होते हैं।
कमाई का पूरा गणित और बाजार भाव 💰
शहतूत की मांग बाजार में बहुत अधिक है। स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के कारण लोग इसे पसंद करते हैं। बाजार में शहतूत का भाव 40 रुपये से लेकर 55 रुपये प्रति किलो तक रहता है। अगर आप एक स्वस्थ ग्राफ्टेड पौधा लगाते हैं, तो वह साल भर में लगभग 5,000 रुपये तक की कमाई करा सकता है। एक एकड़ में अगर सही दूरी पर पौधे लगाए जाएं, तो किसान भाई लाखों में मुनाफा कमा सकते हैं। इसके फल ताजे बिकते हैं और जूस कंपनियों में भी इनकी भारी मांग रहती है।
पौधे लगाने की सही विधि और सावधानियां 🐛
शहतूत लगाने के लिए दो पौधों के बीच कम से कम 8 से 10 फीट की दूरी रखें। गड्ढा खोदते समय उसमें अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें। ग्राफ्टिंग वाले हिस्से को जमीन से थोड़ा ऊपर रखना चाहिए ताकि वहां सड़न न पैदा हो। शुरुआत में पौधे को सीधा रखने के लिए एक लकड़ी का सहारा दें। इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। जल निकासी का अच्छा प्रबंध होना बहुत जरूरी है।
खाद और कीट नियंत्रण के आसान उपाय 🐞
पौधे की अच्छी बढ़त के लिए जैविक खाद सबसे उत्तम है। साल में दो बार पौधों की छंटाई यानी प्रूनिंग जरूर करें। इससे नई टहनियां आती हैं और फल ज्यादा लगते हैं। अगर पत्तों पर कीड़े दिखाई दें, तो नीम के तेल का घोल बनाकर छिड़काव करें। रासायनिक कीटनाशकों से बचें क्योंकि शहतूत के फल बहुत नाजुक होते हैं। सही समय पर की गई देखभाल आपके पौधों को लंबे समय तक फल देने के लायक बनाए रखती है।
बाजार तक पहुंच और बिक्री के तरीके 📈
शहतूत के फल पकने के बाद बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। इसलिए इन्हें सुबह के समय तोड़कर तुरंत बाजार भेजना चाहिए। आप अपनी फसल को स्थानीय सब्जी मंडी या फल की दुकानों पर सीधे बेच सकते हैं। आजकल ऑनलाइन फल बेचने वाली कंपनियां भी किसानों से सीधा संपर्क करती हैं। ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाकर आप न केवल समय बचाते हैं, बल्कि अपनी आमदनी को भी एक नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
कम लागत और कम मेहनत में यह खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। अगर आप भी खेती में कुछ नया करना चाहते हैं, तो ग्राफ्टेड शहतूत एक बेहतरीन विकल्प है।
✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
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