ट्राइकोडर्मा को गोबर की खाद के साथ तैयार करने की विधि बहुत ही सरल और असरदार है। किसान भाई इसे अपने घर पर ही तैयार कर सकते हैं। नीचे इसकी पूरी जानकारी दी गई है:
ट्राइकोडर्मा और गोबर की खाद का मिश्रण तैयार करने की विधि 🌱
ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद है। जब हम इसे गोबर की खाद में मिलाकर कुछ दिनों के लिए रखते हैं, तो इसकी संख्या करोड़ों में बढ़ जाती है। फिर जब हम इसे मिट्टी में डालते हैं, तो यह बीमारियों वाले फफूंद को खत्म कर देता है।
आवश्यक सामग्री 📦
- अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद: 50 से 100 किलो (खाद सूखी और पुरानी होनी चाहिए)।
- ट्राइकोडर्मा पाउडर: 1 से 2 किलो।
- पानी: खाद में नमी बनाए रखने के लिए।
- जूट की बोरी या टाट: खाद को ढकने के लिए।
तैयार करने का तरीका (Step-by-Step) 🛠️
1. जगह का चुनाव
खाद तैयार करने के लिए हमेशा किसी छायादार जगह को चुनें। सीधी धूप ट्राइकोडर्मा को नुकसान पहुँचा सकती है। पेड़ के नीचे या किसी छप्पर के नीचे की जगह सबसे अच्छी होती है।
2. मिश्रण बनाना
सबसे पहले गोबर की खाद का एक ढेर बना लें। अब इस पर 1 से 2 किलो ट्राइकोडर्मा पाउडर छिड़कें। हाथ या फावड़े की मदद से इसे अच्छी तरह मिलाएं ताकि पाउडर पूरी खाद में एक समान मिल जाए।
3. नमी का ध्यान
मिश्रण बनाने के बाद इस पर हल्का पानी छिड़कें। ध्यान रहे कि खाद में सिर्फ नमी होनी चाहिए, पानी बहना नहीं चाहिए। मुट्ठी में दबाने पर लड्डू बन जाए लेकिन पानी न टपके, ऐसी नमी रखें।
4. खाद को ढकना
अब इस ढेर को जूट की बोरी या टाट से अच्छी तरह ढक दें। जूट की बोरी का इस्तेमाल करने से हवा का आना-जाना बना रहता है, जो ट्राइकोडर्मा के बढ़ने के लिए जरूरी है।
5. एक हफ्ते तक इंतजार
इसे 7 से 10 दिनों तक ऐसे ही छोड़ दें। हर 2-3 दिन में खाद को ऊपर-नीचे पलटते रहें और जरूरत पड़ने पर हल्का पानी छिड़कें। आप देखेंगे कि खाद के ऊपर सफेद रंग की फफूंद की परत जमने लगी है। इसका मतलब है कि आपका जैविक कीटनाशक तैयार है।
खेत में इस्तेमाल करने का तरीका 🚜
- इस तैयार खाद को आखिरी जुताई के समय अपने एक एकड़ खेत में बिखेर दें।
- इसे हमेशा शाम के समय या हल्की बारिश के दौरान डालें।
- डालने के तुरंत बाद खेत में हल्की सिंचाई कर दें ताकि ट्राइकोडर्मा मिट्टी के अंदर चला जाए।
जरूरी सावधानियां ⚠️
- ट्राइकोडर्मा के साथ कभी भी किसी रासायनिक फफूंदनाशक (जैसे कार्बेन्डाजिम) का इस्तेमाल न करें।
- खाद को कभी भी प्लास्टिक की पन्नी से न ढकें।
- इसका इस्तेमाल करने के बाद कम से कम 10-15 दिनों तक खेत में कोई जहर या केमिकल न डालें।
इस विधि से तैयार ट्राइकोडर्मा न सिर्फ उकठा रोग को रोकता है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाता है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल हरी-भरी रहती है।
Writer: – Advance Farming Techniques 🌱🐛🐞
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✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
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