परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY): जैविक खेती को बढ़ावा देने की सरकारी पहल
आज के दौर में जब रासायनिक खेती के कारण मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, ऐसे में परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत 2015-16 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक मुक्त खेती की ओर अग्रसर करना और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना है।
PKVY योजना के प्रमुख उद्देश्य
1. जैविक खेती को बढ़ावा देना – किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना खेती करने के लिए प्रशिक्षित करना।
2. मृदा की गुणवत्ता सुधारना – जैविक खेती अपनाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना।
3. किसानों की आय में वृद्धि – जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है।
4. पर्यावरण संरक्षण – जैविक खेती से जल, वायु और मिट्टी का प्रदूषण कम होता है।
5. बाजार से जुड़ाव – किसानों को प्रमाणन प्रक्रिया और ब्रांडिंग के माध्यम से जैविक उत्पादों की बिक्री में मदद करना।
योजना के तहत मिलने वाले लाभ
1. वित्तीय सहायता:
₹50,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि 3 वर्षों के लिए दी जाती है।
इस राशि का उपयोग बीज, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, कृषि यंत्रों आदि के लिए किया जा सकता है।
2. क्लस्टर आधारित खेती:
20 हेक्टेयर भूमि के समूह (Cluster) में जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रत्येक क्लस्टर में कम से कम 50 किसान शामिल होते हैं।
3. प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता:
किसानों को जैविक खेती के आधुनिक एवं पारंपरिक तरीकों की जानकारी दी जाती है।
वर्मी कम्पोस्टिंग, जैविक खाद और जैव कीटनाशक निर्माण की ट्रेनिंग दी जाती है।
4. प्रमाणन और विपणन सहायता:
किसानों को “पीजीएस-इंडिया” (PGS-India) जैविक प्रमाणन प्रणाली के तहत प्रमाणित किया जाता है।
जैविक उत्पादों को बाजार में सही मूल्य पर बेचने के लिए सरकार कृषि बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों से जोड़ने में मदद करती है।
योजना के लिए पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया
योग्य किसान:
इस योजना का लाभ कोई भी किसान, किसान समूह या स्वयं सहायता समूह ले सकता है।
वे किसान जो पहले से ही रासायनिक खेती कर रहे हैं, वे जैविक खेती की ओर शिफ्ट होकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
कैसे करें आवेदन?
किसान राज्य कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री किसान पोर्टल https://www.pmkisan.gov.in/ पर भी इस योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
निष्कर्ष
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) किसानों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, जिससे वे जैविक खेती अपनाकर न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रख सकते हैं बल्कि बाजार में अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप किसान हैं और जैविक खेती में रुचि रखते हैं, तो इस योजना का लाभ उठाएं और पर्यावरण अनुकूल खेती की ओर कदम बढ़ाएं।
✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar
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