बजट 2026: क्या किसानों के साथ धोखा हुआ? 🌾
हाल ही में सरकार ने साल 2026-27 का बजट पेश किया है। लेकिन राजस्थान के किसान इससे बहुत दुखी हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यह बजट खेती के लिए अच्छा नहीं है। इसमें किसानों की कमाई बढ़ाने की कोई बात नहीं की गई। 📉
बजट के आंकड़े और असली सच 📊
सरकार ने इस बार कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान बनाया है। इसमें से खेती को सिर्फ 2.84 लाख करोड़ रुपये मिले। यह पूरे बजट का मात्र 5.31 प्रतिशत हिस्सा है। किसान नेता रामपाल जाट कहते हैं कि यह बहुत कम है।
भारत की करीब 75 प्रतिशत जनता खेती पर निर्भर करती है। इतने बड़े हिस्से को सिर्फ 5 प्रतिशत पैसा मिलना गलत है। नेताओं का मानना है कि यह बजट आम आदमी के लिए नहीं बना है। यह सिर्फ बड़े व्यापारिक घरानों या कॉर्पोरेट की मदद करता है। 🏢
MSP की कानूनी गारंटी कहां है? ⚖️
किसानों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की है। वे चाहते हैं कि सरकार फसल खरीद की कानूनी गारंटी दे। लेकिन बजट में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया। किसानों को डर है कि उनकी फसलों के दाम गिर जाएंगे।
बिना गारंटी के किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पाते। वे बीज और खाद पर बहुत पैसा खर्च करते हैं। अगर फसल का सही दाम नहीं मिला, तो वे कर्ज में डूब जाएंगे। सरकार ने इस बार MSP बढ़ाने का जिक्र भी नहीं किया। 🚜
काजू-बादाम बनाम गेहूं-सोयाबीन 🥜
बजट भाषण में काजू, बादाम और कॉफी जैसी महंगी फसलों की बहुत चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि किसान ये चीजें उगाएं। लेकिन श्रीगंगानगर और कोटा के किसान नाराज हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीन पर ये फसलें नहीं उग सकतीं।
किसान नेता सुभाष सहगल कहते हैं कि रेगिस्तान या मैदानी इलाकों में काजू कैसे होगा? वहां की मिट्टी में सिर्फ गेहूं और सोयाबीन ही पैदा होता है। भाषणों में काजू की बात अच्छी लगती है। लेकिन आम आदमी का पेट गेहूं की रोटी से भरता है। 🌾
खरीदने की ताकत और अर्थव्यवस्था 💰
रामपाल जाट ने एक बहुत पुरानी बात याद दिलाई। जब सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ी, तो सरकार ने खुशी जताई थी। सरकार ने कहा कि इससे बाजार में रौनक आएगी। लोग सामान खरीदेंगे और देश की तरक्की होगी।
अब किसान वही सवाल पूछ रहे हैं। अगर 5 प्रतिशत सरकारी लोगों की आय बढ़ने से देश का भला होता है, तो 75 प्रतिशत किसानों की आय बढ़ने से क्यों नहीं होगा? जब किसान के पास पैसा होगा, तभी वह बाजार से सामान खरीदेगा। इससे पूरी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। 📈
कुदरत की मार और खाली हाथ किसान ⛈️
खेती पूरी तरह मौसम पर टिकी होती है। पिछले कुछ महीनों में बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को तबाह कर दिया। झुंझुनू के किसान सूरज चौधरी कहते हैं कि उनकी मेहनत मिनटों में मिट्टी में मिल गई।
किसानों को उम्मीद थी कि बजट में फसल बीमा पर कुछ खास मिलेगा। लेकिन बजट में उनके इस दर्द का कोई जिक्र नहीं था। खराब मौसम से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई नया रास्ता नहीं दिखाया गया। किसान खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। 😔
किसानों की मुख्य मांगें:
- खेती के लिए बजट में ज्यादा पैसा मिले। ✅
- MSP को कानून बनाया जाए। ✅
- पारंपरिक फसलों के दाम बढ़ाए जाएं। ✅
- बीमा के नियम आसान हों। ✅
इस बजट ने किसानों के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है। ग्रामीण भारत की असलियत शहरों के चमक-धमक वाले भाषणों से अलग है। अब देखना यह है कि क्या सरकार किसानों की इन बातों पर ध्यान देगी।
क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके राज्य में खेती के लिए कितना पैसा मिला है?






