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भयंकर गर्मी में भी उगाएं हरी पालक: कम पानी और तेज धूप में बंपर पैदावार 🌱
आमतौर पर पालक को ठंडे मौसम की फसल माना जाता है। लेकिन सही तकनीक अपनाकर आप इसे मई और जून की गर्मी में भी आसानी से उगा सकते हैं। गर्मी में पालक की मांग बहुत ज्यादा रहती है, जिससे बाजार में इसके बहुत अच्छे दाम मिलते हैं। आज हम जानेंगे कि भयंकर लू के बीच भी आप अपनी पालक की फसल को हरा-भरा कैसे रख सकते हैं।
गर्मी के लिए सही किस्मों का चुनाव ☀️
गर्मी में पालक उगाने के लिए सबसे जरूरी है सही बीजों का चुनाव। ऐसी किस्में चुनें जो ‘हीट टॉलरेंट’ हों यानी तेज धूप सहने की शक्ति रखती हों। ‘पूसा भारती’ और ‘आल ग्रीन’ जैसी किस्में गर्मी के मौसम के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं। ये किस्में जल्दी फूल नहीं निकालतीं और पत्तियां भी कोमल बनी रहती हैं।
बुवाई से पहले बीजों को 12 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इससे अंकुरण जल्दी और समान रूप से होता है। गर्मी में बीजों को अंकुरित होने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत की जरूरत होती है। इसलिए बीजों का उपचार जरूर करें ताकि मिट्टी में मौजूद कीड़ों से बचाव हो सके।
खेत की तैयारी और छाया का प्रबंध 🌳
पालक के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है। खेत तैयार करते समय अच्छी मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। गर्मी में सीधी धूप से बचाने के लिए ‘शेड नेट’ (Shade Net) का इस्तेमाल करना एक समझदारी भरा फैसला है। हरे रंग की 50% वाली नेट लगाने से पौधों को जरूरी रोशनी मिलती है और तापमान भी कम रहता है।
अगर आपके पास शेड नेट नहीं है, तो आप इसे ऊंचे पौधों जैसे मक्का या अरहर के बीच में उगा सकते हैं। ये पौधे पालक को प्राकृतिक छाया देते हैं। मिट्टी को भुरभुरा बनाएं ताकि जड़ों का विकास अच्छे से हो सके। जल निकासी का पूरा ध्यान रखें ताकि पानी जमा न हो।
सिंचाई का सही तरीका 💧
गर्मी में पालक को बहुत ज्यादा नमी की जरूरत होती है। दिन में दो बार हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है। सुबह सूरज निकलने से पहले और शाम को सूरज ढलने के बाद पानी दें। दोपहर में कभी भी पानी न लगाएं, इससे पत्तियां झुलस सकती हैं।
स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पालक के लिए सबसे अच्छी है। इससे पत्तियों पर जमा धूल साफ हो जाती है और पौधे ताजे बने रहते हैं। साथ ही आसपास का तापमान भी कम हो जाता है। ध्यान रहे कि मिट्टी हमेशा नम रहे, लेकिन कीचड़ जैसा पानी न भरा रहे।
खाद और पोषण 🐞
पालक को नाइट्रोजन की ज्यादा जरूरत होती है ताकि पत्तियां बड़ी और हरी रहें। बुवाई के 15-20 दिन बाद हल्की मात्रा में यूरिया का प्रयोग करें। अगर आप जैविक खेती कर रहे हैं, तो वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत का उपयोग सबसे अच्छा है।
पत्तियों पर लिक्विड खाद का छिड़काव करने से बहुत जल्दी असर दिखता है। जब आप पहली कटाई कर लें, तो उसके तुरंत बाद हल्की सिंचाई और खाद दें। इससे अगली कटाई के लिए नई पत्तियां बहुत तेजी से निकलती हैं।
कीट और रोगों से सुरक्षा 🐛
गर्मी में पालक पर पत्तियों को खाने वाले कीड़ों और ‘लीफ माइनर’ का हमला ज्यादा होता है। इनसे बचाव के लिए हर हफ्ते नीम के तेल का छिड़काव करें। खेत के आसपास खरपतवार न उगने दें, क्योंकि ये बीमारियों का घर होते हैं।
अगर पत्तियों पर पीले धब्बे दिखें, तो तुरंत खराब पौधों को हटा दें। पीला चिपचिपा जाल (Yellow Sticky Trap) लगाने से उड़ते हुए कीटों पर लगाम लगाई जा सकती है। प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग ही करें क्योंकि पालक को हम सीधा खाने में इस्तेमाल करते हैं।
कटाई और बाजार का मुनाफा 💰
पालक की फसल बुवाई के 25 से 30 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। पत्तियों को हमेशा सुबह-सुबह काटें जब उनमें सबसे ज्यादा ताजगी और नमी हो। पत्तियों को काटते समय जड़ को नुकसान न पहुंचाएं ताकि वे दोबारा बढ़ सकें।
गर्मी में पालक को तुरंत बाजार भेजना चाहिए। इसे ठंडी जगह पर रखें और हल्का पानी छिड़कते रहें। चूंकि इस मौसम में पालक की आवक कम होती है, इसलिए आपको साधारण मौसम के मुकाबले दोगुना दाम मिल सकता है। कम जगह और कम समय में यह बहुत अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है।
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