मक्का आयात का सच: देश में बंपर उत्पादन फिर भी सरकार क्यों मंगा रही विदेश से मक्का? 🌱
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ के किसान दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाते हैं। इस साल देश में मक्के की बहुत अच्छी पैदावार हुई है। खेतों में मक्का लहलहा रहा है। लेकिन किसानों के चेहरे पर खुशी नहीं है। इसका कारण है सरकार का एक फैसला। सरकार ने विदेश से मक्का आयात करने का मन बना लिया है। इससे हमारे देश के मक्का किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
मक्के का रिकॉर्ड उत्पादन और गिरते दाम 🌽
इस साल मौसम ने किसानों का साथ दिया। मक्के की फसल बहुत अच्छी हुई है। सरकारी आंकड़ों को देखें तो इस बार उत्पादन पिछले सालों से कहीं ज्यादा है। लेकिन जब किसान अपनी फसल लेकर बाजार जा रहे हैं, तो उन्हें सही दाम नहीं मिल रहा। मक्के का सरकारी रेट यानी एमएसपी (MSP) 2400 रुपये है। पर बाजार में इसे 1200 से 1500 रुपये में खरीदा जा रहा है। किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
सरकार मक्का क्यों मंगा रही है? 🚢
अब सवाल यह उठता है कि जब देश में मक्का भरा पड़ा है, तो बाहर से क्यों मंगाया जा रहा है? इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण है **इथेनॉल**। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर जोर दे रही है। इसके लिए बहुत सारे मक्के की जरूरत होती है। दूसरा कारण है **पोल्ट्री सेक्टर** यानी मुर्गी पालन। मुर्गियों के चारे के लिए सस्ता मक्का चाहिए होता है। बड़ी कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए सस्ते मक्के की मांग कर रही हैं।
आयात से किसानों को क्या नुकसान है? 📉
जब बाहर से मक्का भारत आएगा, तो बाजार में मक्के की भरमार हो जाएगी। ऐसे में हमारे देसी मक्के की मांग और कम हो जाएगी। व्यापारी किसानों से और भी कम दाम पर माल मांगेंगे। इससे किसानों का कर्ज बढ़ेगा। बहुत से किसान अब मक्का छोड़कर दूसरी फसल उगाने की सोच रहे हैं। यह हमारी खेती के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
एक और बड़ी चिंता **जीएम (GM) मक्का** की है। अमेरिका जैसे देशों में लैब में तैयार किया गया मक्का उगता है। भारत में इसे उगाना मना है। लेकिन आयात के जरिए यह हमारे खाने और चारे में शामिल हो रहा है। यह हमारी सेहत और धरती के लिए ठीक नहीं हो सकता।
क्या होना चाहिए? ✅
सरकार को सबसे पहले अपने देश के किसानों का सोचना चाहिए। अगर उद्योगों को मक्के की जरूरत है, तो उन्हें किसानों से सही दाम पर खरीदना चाहिए। सरकार को आयात पर रोक लगानी चाहिए ताकि बाजार में मक्के का भाव बढ़े। जब किसान खुशहाल होगा, तभी देश तरक्की करेगा। किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलना ही चाहिए।
मक्का किसानों के लिए यह समय बहुत कठिन है। उन्हें अपनी आवाज उठानी होगी। अगर सही समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मक्का की खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। हमें अपने अन्नदाता के साथ खड़ा होना होगा।






