मध्यप्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ का आगाज 🌱
मध्यप्रदेश सरकार ने साल 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है। इसके लिए राज्य में नई तकनीक और आधुनिक मशीनों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि खेती केवल गुजारे का साधन न रहे। इसे एक फायदे वाला व्यापार बनाया जाए। इसके लिए गांवों में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। अब खेती में विज्ञान का साथ बढ़ रहा है।
गेहूं खरीदी का बड़ा फैसला 🌾
राज्य में 9 अप्रैल 2026 से गेहूं की खरीदी शुरू हो गई है। सरकार ने इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले, इसके लिए केंद्र बनाए गए हैं। वर्तमान में गेहूं का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार इसे बढ़ाकर 2700 रुपये तक ले जाने की कोशिश कर रही है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए पानी और छांव की सुविधा भी दी गई है। अब किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
खाद पर भारी सब्सिडी की सौगात 💰
केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए बड़ी राहत दी है। लगभग 41,533 करोड़ रुपये की फर्टिलाइजर सब्सिडी को मंजूरी मिली है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार माना है। इस सब्सिडी से पोटाश और फास्फेट खाद सस्ती मिलेगी। इससे किसानों की खेती की लागत कम होगी। कम खर्च में ज्यादा पैदावार होने से किसानों की बचत बढ़ेगी। यह फैसला छोटे किसानों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।
आधुनिक तकनीक और ‘कृषि मंथन’ 🚜
जबलपुर में आयोजित ‘कृषि मंथन’ कार्यशाला में नई तकनीकों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने फसलों की ऐसी किस्में तैयार की हैं जो कम पानी में अच्छी उपज दें। मुख्यमंत्री ने खेती में ड्रोन और स्मार्ट मशीनों के इस्तेमाल को जरूरी बताया है। अब किसान घर बैठे मौसम की जानकारी पा सकते हैं। तकनीक के जुड़ने से खेती का रिस्क कम हो गया है। नई पीढ़ी के युवा भी अब एग्री-स्टार्टअप के जरिए खेती से जुड़ रहे हैं।
पशुपालन और दूध उत्पादन में वृद्धि 🥛
खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश का लक्ष्य दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है। इसके लिए ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस’ योजना चलाई जा रही है। पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु और कम ब्याज पर लोन दिया जा रहा है। दूध का उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सरकार स्कूलों में बच्चों को दूध के पैकेट भी बांट रही है ताकि पोषण बना रहे।
सिंचाई और बिजली की बेहतर सुविधा ⚡
किसानों को खेती के लिए पर्याप्त बिजली दी जा रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को 5 एचपी तक मुफ्त बिजली मिल रही है। पीएम-कुसुम योजना के तहत लाखों किसानों को सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इससे सिंचाई का खर्च लगभग शून्य हो जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसानों को किसी भी संसाधन की कमी न हो। हर खेत तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
फसल बीमा और सुरक्षा कवच 🐛
प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा योजना का विस्तार किया गया है। अब इसमें बागवानी फसलों को भी शामिल किया गया है। पिछले समय में प्रभावित किसानों को करोड़ों रुपये की राहत राशि दी गई है। सोयाबीन और सरसों के किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ मिला है। सरकार का यह सुरक्षा कवच किसानों को कर्ज के जाल से बचाने में मदद कर रहा है।
मध्यप्रदेश अब कृषि क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बन गया है। परंपरा और आधुनिकता के मेल से यहाँ के किसान समृद्ध हो रहे हैं। सरकार की नीतियां और किसानों की मेहनत रंग ला रही है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि केंद्र बनेगा। किसान अब स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ रहे हैं। खेती का यह नया स्वरूप पूरे देश के लिए एक उदाहरण है।






