गेहूं की कटाई के बाद मूंग की खेती: 70 दिनों में कमाएं मोटा मुनाफा 🌾💰
किसान भाइयों, गेहूं की कटाई के बाद अक्सर खेत खाली रह जाते हैं। यह समय आपके लिए अतिरिक्त कमाई का बहुत अच्छा मौका है। रबी की फसल काटने के बाद आप अपने खेत में जायद मूंग की बुवाई कर सकते हैं। मूंग की फसल मात्र 60 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इससे न केवल आपको कम समय में पैसा मिलता है, बल्कि आपके खेत की सेहत भी सुधरती है।
मूंग एक दलहनी फसल है। इसकी जड़ों में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करते हैं। इससे अगली फसल के लिए यूरिया की जरूरत कम पड़ती है। कम लागत और कम पानी में यह फसल किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
मूंग की खेती के लिए सही समय और तैयारी ⏳🚜
जायद मूंग बोने का सबसे सही समय 15 मार्च से 15 अप्रैल तक होता है। अगर आप देर करेंगे तो बारिश के समय फसल खराब होने का डर रहता है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें। खेत में नमी बनाए रखने के लिए एक हल्की सिंचाई (पलेवा) करना जरूरी है।
मिट्टी में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। दोमट और मटियार मिट्टी मूंग के लिए सबसे बढ़िया मानी जाती है। खेत तैयार करते समय गोबर की खाद डालने से पैदावार और भी अच्छी होती है।
उन्नत किस्मों का चुनाव करें 🌱🔍
ज्यादा मुनाफा पाने के लिए सही बीज का चुनाव करना बहुत जरूरी है। बाजार में कई ऐसी किस्में हैं जो कम समय में ज्यादा फल देती हैं। कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं:
- SML 668: यह किस्म मात्र 60 दिनों में तैयार हो जाती है।
- IPM 02-3: यह रोगों से लड़ने में सक्षम है और पैदावार अच्छी देती है।
- Pusa Baisakhi: यह पुरानी और भरोसेमंद किस्म है।
- MH 421: यह गर्मी सहने की अच्छी ताकत रखती है।
बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें। राइजोबियम कल्चर से बीज को उपचारित करने पर जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों का विकास तेजी से होता है।
खाद, पानी और सही देखभाल 💧🌿
मूंग की फसल को बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। बुवाई के समय 20 किलो नाइट्रोजन और 40 किलो फास्फोरस प्रति हेक्टेयर देना काफी है। गर्मी के मौसम में सिंचाई का खास ध्यान रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें। इसके बाद जरूरत के हिसाब से 10-12 दिनों के अंतर पर पानी देते रहें।
फूल आते समय और फलियां बनते समय खेत में नमी का होना बहुत जरूरी है। इस समय पानी की कमी होने से पैदावार घट सकती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के बाद शुरूआती 20-25 दिनों में निराई-गुड़ाई जरूर करें।
कीट और रोगों से बचाव 🐛पत्ता
मूंग की फसल में पीला मोजेक वायरस और सफेद मक्खी का हमला हो सकता है। इससे बचने के लिए खेत की निगरानी करते रहें। अगर पत्तों पर पीलापन दिखे तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उचित कीटनाशक का छिड़काव करें। समय पर देखभाल करने से आप 10 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार ले सकते हैं।
कटाई और कमाई 🧺💵
जब फलियां काली पड़ने लगें और दाने सख्त हो जाएं, तब फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। ज्यादा सूखने पर फलियां खेत में ही चटकने लगती हैं, जिससे नुकसान हो सकता है। मूंग की दाल और साबुत मूंग की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, इसलिए आपको इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं।
Writer: – Advance Farming Techniques 🌱🐛🐞
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