जबलपुर कृषि मंथन 2026: एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल बना किसानों की नई उम्मीद 🌱🐄🐟
नमस्कार किसान भाइयों! मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित ‘कृषि मंथन 2026’ इस समय देशभर के कृषि जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बड़े सम्मेलन में आधुनिक खेती की कई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। लेकिन जिस एक चीज ने छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह है ‘एकीकृत कृषि प्रणाली’ (Integrated Farming System – IFS) का मॉडल।
वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलकर इस मॉडल को अपनाते हैं, तो उनकी आय न केवल दोगुनी होगी, बल्कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षित रहेंगे। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि यह मॉडल क्या है और इसे आप अपने खेत में कैसे लागू कर सकते हैं।
एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) क्या है? 🤔
आसान शब्दों में कहें तो एकीकृत कृषि प्रणाली एक ऐसी तकनीक है जिसमें खेत के एक ही टुकड़े पर एक साथ कई काम किए जाते हैं। इसमें मुख्य फसल उगाने के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन को जोड़ा जाता है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘शून्य कचरा’ (Zero Waste) सिद्धांत है। इसका मतलब है कि एक इकाई से निकलने वाला कचरा दूसरी इकाई के लिए संसाधन बन जाता है। जैसे:
- पशुओं का गोबर और मूत्र खेत के लिए खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का काम करता है।
- फसलों के अवशेष जैसे भूसा और डंठल पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बनते हैं।
- मछली के तालाब का पोषक तत्वों से भरपूर पानी सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।
जबलपुर कृषि मंथन में प्रदर्शित मुख्य मॉडल 🌟
सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने एक एकड़ और पांच एकड़ के अलग-अलग मॉडल पेश किए। इनकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं:
1. बहुफसली खेती (Multi-Cropping)
केवल गेहूं या धान पर निर्भर रहने के बजाय, खेत में दालें, तिलहन और औषधीय पौधे लगाने की सलाह दी गई। इससे मिट्टी की ताकत बनी रहती है और अलग-अलग समय पर फसल मिलने से नकदी की कमी नहीं होती।
2. खेत में तालाब और मछली पालन
खेत के सबसे निचले हिस्से में छोटा तालाब बनाकर मछली और बत्तख पालन का मॉडल दिखाया गया। बत्तखें तालाब के कीड़ों को खाती हैं और उनका मलमूत्र मछलियों का भोजन बनता है। यह एक प्राकृतिक चक्र है जिसमें खर्चा बहुत कम आता है।
3. बाड़ पर बागवानी (Border Plantation)
खेत की मेड़ों को खाली छोड़ने के बजाय वहां मुनगा (सहजन), पपीता, नींबू या करौंदा जैसे पेड़ लगाने का प्रदर्शन किया गया। ये पेड़ न केवल हवा से फसल की रक्षा करते हैं, बल्कि अतिरिक्त फल भी देते हैं।
4. जैविक खाद यूनिट
खेत के एक कोने में वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) यूनिट लगाना अनिवार्य बताया गया। इससे किसान को बाजार से महंगी रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे खेती की लागत बहुत कम हो जाती है।
IFS मॉडल अपनाने के बड़े फायदे 💰
हर दिन होगी कमाई
पारंपरिक खेती में पैसा साल में सिर्फ दो बार (फसल कटने पर) आता है। लेकिन IFS मॉडल में आप रोज दूध बेच सकते हैं, हर हफ्ते सब्जियां बेच सकते हैं और हर कुछ महीनों में मछली या मुर्गी बेच सकते हैं। इससे किसान के हाथ में हमेशा पैसा रहता है।
जोखिम का कम होना
खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। अगर ओलावृष्टि या सूखे से फसल खराब भी हो जाए, तो पशुपालन या मछली पालन से होने वाली कमाई किसान को कर्ज के जाल में फंसने से बचा लेती है।
रोजगार के अवसर
यह प्रणाली पूरे परिवार को साल भर काम देती है। युवाओं को शहर जाने के बजाय अपने ही गांव में एक सफल बिजनेस चलाने का मौका मिलता है।
वैज्ञानिक सलाह और सरकारी मदद 👨🔬
कृषि मंथन 2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि सरकार एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने वाले किसानों को विशेष ऋण और सब्सिडी दे रही है। पशुओं के शेड बनाने, मछली के तालाब खोदने और सोलर पंप लगाने के लिए भारी छूट उपलब्ध है।
किसान भाई अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जाकर इस मॉडल की ट्रेनिंग ले सकते हैं। जबलपुर का यह मॉडल साबित करता है कि अगर हम नई सोच और वैज्ञानिक तरीके से काम करें, तो खेती वाकई एक फायदे का सौदा है।

