गर्मी में उड़द की खेती: कम लागत और भारी मुनाफे का गाइड

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गर्मी में उड़द की खेती: कम मेहनत में बंपर पैदावार पाने के तरीके 🌱

गर्मी के मौसम में उड़द की खेती भारतीय किसानों के लिए एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। इसे ‘जायद उड़द’ भी कहते हैं। यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। उड़द की दाल की बाजार में हमेशा ऊंची मांग रहती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। अगर आपके पास सिंचाई की सुविधा है, तो आप गेहूं के बाद खाली खेत में उड़द उगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मी में उड़द उगाने का पूरा तरीका।

उन्नत किस्मों का चुनाव और बीज दर 🌾

सफल खेती के लिए सही बीज का चुनाव सबसे जरूरी है। गर्मी के लिए ऐसी किस्में चुनें जो 60 से 70 दिनों में पक जाएं। ‘पंत उड़द-31’, ‘आजाद उड़द-1’ और ‘टी-9’ जैसी किस्में गर्मी के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं। एक एकड़ के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज की जरूरत होती है। बीज बोने से पहले उन्हें फफूंदनाशक दवा और राइजोबियम कल्चर से उपचारित जरूर करें। इससे जड़ें मजबूत होती हैं और बीमारियां कम लगती हैं।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜

उड़द के लिए खेत का समतल होना बहुत जरूरी है। गेहूं की कटाई के बाद खेत की एक-दो जुताई करके पाटा लगा दें। बुवाई का सबसे सही समय 15 मार्च से 15 अप्रैल तक है। बुवाई हमेशा कतारों में करें। दो कतारों के बीच 25 से 30 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बीजों को मिट्टी में 4-5 सेंटीमीटर गहरा बोएं। सही समय पर बुवाई करने से मानसून आने से पहले फसल की कटाई सुरक्षित तरीके से हो जाती है।

गर्मी में सिंचाई का प्रबंधन ⚙️

तेज धूप और गर्मी के कारण उड़द को नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें। इसके बाद मिट्टी की नमी देखते हुए हर 10-12 दिन पर पानी देते रहें। ध्यान रखें कि जब पौधों में फूल आ रहे हों और फलियां बन रही हों, तब खेत में सूखा न पड़ने दें। इस समय पानी की कमी होने पर दाने छोटे रह सकते हैं। शाम के समय सिंचाई करना पौधों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहता है।

खाद और पोषण की सही मात्रा 💰

उड़द अपनी जड़ों के जरिए हवा से नाइट्रोजन खुद ले लेती है। इसलिए इसे बहुत ज्यादा यूरिया की जरूरत नहीं होती। बुवाई के समय संतुलित मात्रा में DAP और पोटाश का प्रयोग करें। सल्फर यानी गंधक डालने से उड़द के दानों में चमक आती है और उनकी गुणवत्ता बढ़ती है। अगर मुमकिन हो तो खेत की तैयारी के समय पुरानी गोबर की खाद जरूर मिलाएं। इससे मिट्टी में नमी रोकने की ताकत बढ़ती है और पौधों को पूरा पोषण मिलता है।

खरपतवार और कीट नियंत्रण 🐛

शुरुआत के 30 दिनों तक खेत को खरपतवार से बचाना बहुत जरूरी है। घास फसल का सारा पोषण सोख लेती है। बुवाई के 20 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें। उड़द में ‘सफेद मक्खी’ और ‘पीला मोजेक’ वायरस का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें। अगर पत्तों पर छेद या इल्ली दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें। साफ खेत में हमेशा अच्छी पैदावार होती है।

फसल की कटाई और सुखाने का तरीका 🚜

जब उड़द की फलियां सूखकर काली या भूरी हो जाएं, तब समझें कि फसल तैयार है। देर करने पर फलियां चटक सकती हैं और दाने जमीन पर गिर सकते हैं। कटाई के बाद पौधों को खलिहान में छोटे ढेरों में रखें और अच्छी तरह सुखाएं। जब दाने कड़े हो जाएं, तब थ्रेसिंग करके अनाज अलग कर लें। दानों को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें ताकि घुन न लगे।

मुनाफे की बात 💰

उड़द की खेती से न केवल दाल मिलती है, बल्कि इसका भूसा पशुओं के लिए बहुत अच्छा चारा है। यह कम खर्च में तैयार होने वाली नकदी फसल है। दलहनी फसल होने के कारण यह अगली फसल के लिए खेत में खाद का काम भी करती है। सही तकनीक और देखरेख से किसान भाई गर्मी के सीजन में भी अपनी आय को दो गुना कर सकते हैं। आज ही उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ाएं।



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