
मुर्गी पालन: गर्मियों में लू और उष्माघात (Heat Stroke) से बचाव के उपाय
मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें बारीकियों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, मुर्गियों की देखभाल के तरीके भी बदलने चाहिए। भारत में गर्मियों का मौसम मुर्गी पालकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। जब हवा का तापमान 26°C से 30°C तक पहुँच जाता है, तब मुर्गियों को बेचैनी होने लगती है। यदि तापमान इससे ऊपर चला जाए, तो उन्हें उष्माघात यानी हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
मुर्गियों के शरीर पर पसीने की ग्रंथियां नहीं होतीं। वे अपने शरीर की गर्मी निकालने के लिए मुंह खोलकर तेजी से हांफती हैं। इस प्रक्रिया में उनके शरीर से पानी कम हो जाता है और वे कमजोर पड़ जाती हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे आप अपनी मुर्गियों को गर्मी के प्रकोप से बचा सकते हैं।
शेड का सही प्रबंधन 🏠
मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए सबसे पहला कदम उनके रहने की जगह यानी शेड को ठंडा रखना है। शेड का निर्माण हमेशा पूर्व-पश्चिम दिशा में होना चाहिए ताकि सूरज की सीधी रोशनी अंदर न आए।
- छत की पुताई: शेड की छत अगर सीमेंट या चद्दर की है, तो उस पर सफेद चूना लगाएं। सफेद रंग सूरज की किरणों को परावर्तित करता है, जिससे छत कम गर्म होती है।
- छत पर घास डालना: छत के ऊपर सूखी घास या पुआल की एक मोटी परत बिछा दें। इस पर समय-समय पर पानी छिड़कते रहें। इससे शेड के अंदर का तापमान 5 डिग्री तक कम हो सकता है।
- पर्दे और गोणपाट: शेड की जालियों पर जूट के बोरे या मोटे पर्दे लटकाएं। इन पर्दों को दोपहर के समय गीला रखें। बाहर से आने वाली गर्म हवा जब इन गीले पर्दों से टकराएगी, तो वह ठंडी होकर अंदर आएगी।
पानी का खास इंतजाम 💧
गर्मियों में मुर्गियां दाने से ज्यादा पानी पीती हैं। पानी की कमी होने पर मुर्गियां तुरंत बीमार पड़ सकती हैं या उनकी मौत हो सकती है।
पानी को ठंडा रखने के लिए पाइपलाइन और पानी की टंकी को सीधी धूप से बचाएं। टंकी को चारों तरफ से गीले बोरों से ढंक कर रखें। मुर्गियों को दिन में कम से कम 3 से 4 बार ताजा और ठंडा पानी दें। पानी में इलेक्ट्रोलाइट (Electrolytes) पाउडर या थोड़ा सा नमक और शक्कर मिलाना फायदेमंद रहता है। इससे उनके शरीर में लवणों की कमी पूरी होती है।
फीडिंग या दाना देने का सही समय 🌾
गर्मी के दिनों में मुर्गियां दाना खाना कम कर देती हैं। अगर वे दोपहर की गर्मी में दाना खाती हैं, तो उनके शरीर में पाचन के दौरान और ज्यादा गर्मी पैदा होती है।
इसलिए, मुर्गियों को सुबह जल्दी (सूरज निकलने से पहले) और शाम को (सूरज ढलने के बाद) दाना दें। दोपहर के समय यानी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शेड से दाने के बर्तन हटा दें। इससे मुर्गियां शांत रहेंगी और उन्हें गर्मी कम लगेगी। आहार में विटामिन-सी और विटामिन-ई की मात्रा बढ़ा दें, जो उन्हें तनाव से लड़ने में मदद करती है।
हवा और रोशनी का तालमेल 🌬️
शेड के अंदर हवा का संचार (Ventilation) अच्छा होना चाहिए। उमस भरी गर्मी मुर्गियों के लिए सबसे ज्यादा जानलेवा होती है।
अगर संभव हो तो शेड में एग्जॉस्ट फैन लगवाएं। बड़े फार्म में फॉगर्स (Foggers) का उपयोग करें। फॉगर्स पानी की बहुत बारीक फुहारें छोड़ते हैं जो हवा को तुरंत ठंडा कर देती हैं। ध्यान रहे कि फॉगर्स से बिछावन (Litter) ज्यादा गीली न हो, अन्यथा अमोनिया गैस बन सकती है।
बिछावन या लीटर का प्रबंधन 🧹
सर्दियों में हम बिछावन की मोटी परत रखते हैं, लेकिन गर्मियों में इसे बदल देना चाहिए। बिछावन की मोटाई केवल 2 से 3 इंच ही रखें। अगर बिछावन बहुत पुरानी या गंदी हो गई है, तो उसे बदल दें क्योंकि गंदी बिछावन से गर्मी ज्यादा निकलती है। समय-समय पर बिछावन को ऊपर-नीचे करते रहें ताकि उसमें हवा लगती रहे।
टीकाकरण और दवाएं 💉
गर्मी के मौसम में मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे समय में रानीखेत जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय पर टीकाकरण पूरा करें। किसी भी प्रकार की दवा या टीका केवल सुबह या शाम के ठंडे समय में ही दें। दोपहर के समय मुर्गियों को पकड़ना या उन्हें परेशान करना टालें, क्योंकि इससे उन्हें स्ट्रेस होता है।
उष्माघात (Heat Stroke) के लक्षण कैसे पहचानें? 🤔
एक सजग मुर्गी पालक को अपनी मुर्गियों के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। यदि आपकी मुर्गियां नीचे लिखे लक्षण दिखा रही हैं, तो समझ जाएं कि वे संकट में हैं:
- मुंह खोलकर बहुत तेजी से सांस लेना।
- पंखों को शरीर से दूर फैलाकर रखना।
- बहुत ज्यादा सुस्त हो जाना और कोनों में दुबकना।
- दाना बिल्कुल बंद कर देना और बहुत ज्यादा पानी पीना।
- अचानक से मुर्गियों की मौत होना।
ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें और प्रभावित पक्षियों को ठंडी जगह पर शिफ्ट करें। उनके सिर पर हल्का ठंडा पानी छिड़कना भी मददगार हो सकता है।
सावधानियां और सुझाव 💡
1. शेड के आसपास छायादार पेड़ जैसे नीम या बरगद लगाएं। ये लंबे समय में आपके फार्म को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखेंगे।
2. मुर्गियों की संख्या शेड की क्षमता से 10 से 20 प्रतिशत कम रखें। ज्यादा भीड़ से गर्मी बढ़ती है।
3. मुर्गियों को दोपहर के वक्त बिल्कुल न छेड़ें। उन्हें आराम करने दें।
4. बिजली जाने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था (Inverter या Generator) रखें ताकि पंखे चलते रहें।
मुर्गी पालन में गर्मी का प्रबंधन ही आपकी सफलता की कुंजी है। यदि आप इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाते हैं, तो न केवल आपकी मुर्गियां स्वस्थ रहेंगी, बल्कि आपका मुनाफा भी बढ़ेगा। जागरूक किसान ही सफल किसान बनता है।
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