गर्मी में ज्वार की खेती: तेज धूप में भी पाएं बंपर पैदावार

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गर्मी में ज्वार की खेती: कम पानी और अधिक तापमान में सफल फसल 🌱

ज्वार एक बहुत ही मजबूत फसल है। इसे ‘सूखा सहने वाली फसल’ भी कहा जाता है। गर्मी के मौसम यानी जायद के समय इसकी खेती बहुत लाभदायक होती है। यह फसल तेज धूप और कम नमी में भी अपना अस्तित्व बनाए रखती है। ज्वार का उपयोग अनाज और चारे दोनों के लिए किया जाता है। गर्मी के दिनों में जब चारे की कमी होती है, तब ज्वार पशुओं के लिए वरदान साबित होती है। आइए जानते हैं भीषण गर्मी में ज्वार उगाने के सबसे अच्छे तरीके।

गर्मी सहने वाली उन्नत किस्मों का चुनाव 🌾

गर्मी की ज्वार के लिए ऐसी किस्में चुनें जो कम समय में तैयार हों। हाइब्रिड किस्में जैसे ‘सीएसएच-9’ या ‘सीएसएच-14’ गर्मी के लिए बहुत अच्छी हैं। चारे के लिए ‘एसएसजी-59-3’ जैसी किस्में बेहतरीन पैदावार देती हैं। उन्नत किस्मों के बीज रोगमुक्त होते हैं और ज्यादा अनाज देते हैं। बीज खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर करें। सही बीज ही आपकी मेहनत को सफल बनाएगा।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜

ज्वार के लिए खेत की गहरी जुताई जरूरी है। इससे मिट्टी की जल सोखने की क्षमता बढ़ती है। बुवाई का सही समय फरवरी के अंत से मार्च के मध्य तक है। बीजों को कतारों में बोएं ताकि हवा का संचार अच्छा रहे। दो कतारों के बीच 45 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। इससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधे मजबूत बनते हैं।

गर्मी में सिंचाई का सही प्रबंधन ⚙️

ज्वार को अन्य फसलों की तुलना में कम पानी चाहिए। लेकिन गर्मी में समय पर पानी देना बहुत जरूरी है। मिट्टी की किस्म के अनुसार 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। जब पौधों में बालियां निकल रही हों, तब सिंचाई कभी न छोड़ें। इस समय पानी की कमी से पैदावार घट सकती है। शाम के समय पानी देना सबसे अच्छा रहता है क्योंकि इससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है।

खाद और मिट्टी का पोषण 💰

बुवाई से पहले खेत में अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है। नाइट्रोजन और फास्फोरस का संतुलित उपयोग करें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी की मात्रा एक महीने बाद दें। गर्मी में पौधों को पोषण की ज्यादा जरूरत होती है। मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरक डालें। इससे फालतू खर्च बचेगा और पौधों को सही खुराक मिलेगी।

खरपतवार और कीटों से सुरक्षा 🐛

शुरुआत के 30-40 दिनों तक खेत को घास से मुक्त रखें। खरपतवार पौधों का पानी और खाद चुरा लेते हैं। ज्वार में ‘तना मक्खी’ का प्रकोप ज्यादा होता है। यह पौधों के बीच के हिस्से को सुखा देती है। इससे बचाव के लिए बीज उपचार बहुत जरूरी है। अगर कीटों का हमला दिखे, तो जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। नियमित देखभाल से आपकी फसल सुरक्षित रहेगी।

कटाई और भंडारण की विधि 🚜

जब दाने सख्त हो जाएं और दानों के निचले हिस्से पर काला धब्बा दिखने लगे, तब कटाई करें। बालियों को काटकर धूप में अच्छी तरह सुखाएं। अनाज में नमी 12 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। अगर आप चारे के लिए उगा रहे हैं, तो फूल आने पर कटाई करें। सूखे अनाज को साफ और हवादार जगह पर रखें। सही भंडारण से अनाज लंबे समय तक कीड़ों से बचा रहता है।

गर्मी में ज्वार की खेती एक सुरक्षित निवेश है। यह फसल विपरीत मौसम में भी किसानों का साथ नहीं छोड़ती। ज्वार उगाने से न केवल आपको अनाज मिलेगा, बल्कि पशुओं के लिए मीठा और पौष्टिक चारा भी प्राप्त होगा। आधुनिक तकनीक अपनाएं और अपनी आय बढ़ाएं। आज का सही फैसला आपके कल को खुशहाल बनाएगा। खेती को लाभ का पेशा बनाने के लिए ज्वार एक बेहतरीन विकल्प है।



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