कम पानी वाले क्षेत्रों में गर्मी के बाजरा की खेती: बेहतरीन टिप्स

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गर्मी में बाजरा की खेती: कम बारिश और रेतीली मिट्टी में बंपर पैदावार 🌱

बाजरा एक ऐसी फसल है जो बहुत कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती है। इसे ‘रेगिस्तान का राजा’ भी कहा जाता है। गर्मी के मौसम यानी जायद सीजन में बाजरा उगाना बहुत फायदेमंद होता है। खासकर उन इलाकों में जहाँ बारिश कम होती है और धूप तेज पड़ती है। इस समय उगे बाजरे में कीटों का हमला कम होता है। साथ ही इसके दाने बहुत मजबूत और पौष्टिक होते हैं। आइए जानते हैं कम संसाधनों में बाजरा उगाने के बेहतरीन तरीके।

गर्मी सहने वाली उन्नत किस्मों का चुनाव 🌾

गर्मी की खेती के लिए सही बीज चुनना सबसे पहला कदम है। ऐसी किस्में चुनें जो सूखे को बर्दाश्त कर सकें। हाइब्रिड किस्में जैसे ‘पायनियर’ या ‘प्रो-एग्रो’ बहुत लोकप्रिय हैं। ये कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्नत बीज न केवल ज्यादा उपज देते हैं बल्कि उनका चारा भी हरा रहता है। बीज बोने से पहले उन्हें उपचारित जरूर करें। इससे मिट्टी से होने वाली बीमारियों का खतरा खत्म हो जाता है।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय 🚜

बाजरा के लिए बहुत ज्यादा जुताई की जरूरत नहीं होती। एक-दो बार गहरी जुताई करके जमीन को भुरभुरा कर लें। बुवाई का सबसे सही समय फरवरी के अंत से लेकर मार्च के मध्य तक है। बीजों को कतारों में बोएं। दो कतारों के बीच 45 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बीजों को 2-3 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न दबाएं। इससे पौधे जल्दी और एक साथ बाहर निकलते हैं। मिट्टी में हल्की नमी बुवाई के समय बहुत जरूरी है।

कम पानी में सिंचाई का प्रबंधन ⚙️

बाजरा को बहुत कम पानी चाहिए होता है। फिर भी गर्मी में समय पर सिंचाई करना जरूरी है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें। जब बाजरे में बालियां निकल रही हों और दाने भर रहे हों, तब पानी की कमी न होने दें। अगर आपके पास पानी कम है, तो शाम के समय सिंचाई करें। इससे पानी मिट्टी में लंबे समय तक टिका रहता है। फव्वारा सिंचाई (Sprinkler) बाजरा के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

खाद और पोषण की सही मात्रा 💰

रेतीली मिट्टी में पोषण की कमी जल्दी होती है। इसलिए बुवाई से पहले सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और आधी मात्रा एक महीने बाद दें। बाजरा को जिंक की भी जरूरत होती है। जिंक डालने से दाने चमकदार और वजनदार बनते हैं। रसायनों के बजाय जैविक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है।

निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण 🚜

बाजरा के पौधों को शुरू में बढ़ने के लिए जगह चाहिए होती है। अगर खेत में घास ज्यादा होगी, तो पौधे कमजोर रह जाएंगे। बुवाई के 15-20 दिन बाद पहली निराई जरूर करें। इससे जड़ों को हवा मिलती है और वे गहराई तक जाती हैं। पौधों के बीच की भीड़ कम करने के लिए ‘विरलीकरण’ (Thinning) करें। एक जगह पर एक ही स्वस्थ पौधा रहने दें। इससे हर पौधे को बराबर पोषण और धूप मिलेगी।

कीट और रोगों से बचाव 🐛

बाजरा में आमतौर पर बीमारियां कम लगती हैं। लेकिन कभी-कभी ‘अरगट’ या ‘दीमक’ का हमला हो सकता है। दीमक से बचने के लिए नीम की खली का उपयोग करें। अगर बालियां काली पड़ने लगें, तो विशेषज्ञ की सलाह पर दवा का छिड़काव करें। फसल चक्र अपनाना भी बीमारियों को रोकने का एक अच्छा तरीका है। साफ-सफाई का ध्यान रखने से आधे कीट अपने आप दूर भाग जाते हैं।

कटाई और दानों का भंडारण 🚜

जब दाने सख्त हो जाएं और बालियां सूखकर पीली पड़ने लगें, तब कटाई करें। बाजरे की बालियों को अलग करके अच्छी तरह धूप में सुखाएं। दानों में नमी 10-12 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। अगर नमी ज्यादा होगी, तो भंडारण के समय घुन लग सकता है। सूखे दानों को नमी मुक्त बोरियों या टंकी में रखें। बाजरा न केवल अनाज के लिए बल्कि इसके कड़ब (चारे) के लिए भी बहुत कीमती है।

बाजरा की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है। यह कठिन परिस्थितियों में भी किसानों का साथ निभाती है। आधुनिक जानकारी और थोड़ी सी मेहनत से आप अपनी बंजर जमीन से भी सोना निकाल सकते हैं। बाजरा उगाकर आप न केवल कमाई करेंगे, बल्कि पशुओं के लिए उत्तम चारा भी पाएंगे। आज ही उन्नत बाजरा खेती की शुरुआत करें और आत्मनिर्भर बनें।



✍️ About the Author: Dhiraj Bhisekar


🛡️ Editorial Review Process: This article has been reviewed by the Advance Farming Technics editorial team for accuracy. Prices and government policies are subject to change. Always consult local agricultural officers for final confirmation.

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